29/04/2025
#सभी #साथी #जरूर पढ़ें।
सभी साथियों को हमारा क्रांतिकारी सलाम!
ब्राह्मणवादी संशोधनवादी महिला विरोधी
मानसिकता के खिलाफ संघर्ष तेज करो।
साथियों, छात्र एकता मंच के सामने एक गंभीर मामला आया है।
जिसमें (मजदूर अधिकार संगठन) ने बताया गया कि सुमित देवडू संगठन में कार्यरत रहते समय संगठन के नेतृत्व के खिलाफ जाकर संगठन तोड़ने , महिला विरोधी गतिविधियों और उपभोक्तावादी गतिविधियों में शामिल पाया गया है।
जिसके कारण सुमित को संगठन ने निकाल दिया गया है।
हम मजदूर अधिकार संगठन द्वारा की गई इस कार्रवाई का समर्थन करते हैं और इस तरह से मजदूर, किसान,महिला विरोधी मानसिकता का वाले सुमित देवडू का विरोध करते हैं
और मजदूर अधिकार संगठन के फैसले का समर्थन करते हैं।
सुमित जैसे तत्वों के द्वारा की गई जाने वाली इस प्रकार की कार्रवाई महिला विरोधी,जन विरोधी मानसिकता के खिलाफ आप सभी से आवाज उठाने की अपील करते हैं। ऐसे लोग समाज में कुरीतियां फैलाने के अलावा और कुछ नहीं करते इन्हें जनता के दुखों और तकलीफों से कुछ लेना देना नहीं होता ऐसे लोग समाज के साथ धोखा ही करते है।
साथ में जनता के शोषण को बढ़ाने में राज्य की मदद करते है।
साथियों हम आपको बता देना चाहते हैं कि *सुमित देवुडु (सोनीपत) कुछ साल पहले छात्र एकता मंच का सदस्य भी रहा है जो बाद में पढ़ाई पूरी होने के बाद मजदूर अधिकार संगठन में काम करने चला गया था ।
अत: मजदूर अधिकार संगठन द्वारा की गई जांच पड़ताल और कार्रवाई के आधार पर छात्र एकता मंच की कार्यकारिके कमेटी ने इस मामला पर यह निर्णय लिया है
की छात्र एकता मंच से (सुमित देवडू,सोनीपत) औपचारिक रूप से निकाल दिया जाए है और इस बारे में सभी संगठन सदस्यों व सभी हमदर्दों से संगठन अपील करता है और सूचित करता है कि सुमित देवडू जैसे मजदूर, किसान विरोधी,महिला विरोधी मानसिकता के लोगों को इतिहास के कूड़ेदान में फेंक दें एक बार हम फिर से मजदूर अधिकार संगठन का समर्थन करते हैं।
और सुमित देवडू सोनीपत जैसी तत्वों को बहिष्कार करते हैं।
संशोधन वाद के खिलाफ संघर्ष तेज करो!
साम्राज्यवाद मुर्दाबाद!
इंकलाब जिंदाबाद!
छात्र एकता मंच ( हरियाणा )
Press release
अवसरवादी - विघटनवादी - संसोधनवादी, महिला विरोधी सुमित देवडू का बहिष्कार करो!
संगठन की क्रांतिकारी विचारधारा मार्क्सवाद को ठोस व्यवहार में लागू करते हुए जुझारू मजदूर आंदोलन का निर्माण करो!
साथियों, आज शासक वर्ग मजदूर आंदोलन समेत दुनिया के हर जनहितैषी आंदोलन को खत्म करने के लिए शारीरिक व मानसिक युद्ध छेड़े हुए हैं. एक तरफ जनता के आंदोलन को पुलिस-फ़ौज के माध्यम से खत्म करने की कोशिश की जा रही है वही दूसरी तरफ जनता में व जनता के हितों में काम करने वाले कार्यकर्ताओं में अविश्वास की भावना पैदा करने के लिए लगातार मीडिया के माध्यम से लगातार मार्क्सवाद विरोधी प्रचार किया जा रहा है. मार्क्सवाद को गलत साबित करने के लिए शिक्षण संस्थानों में अनेक शोध करवा रहा है. शासक वर्ग ये साबित करने में लगा हुआ है कि मार्क्सवाद फेल हो चुका है व पूंजीवाद जनवाद ही एकमात्र ऐसी विचारधारा है जो दुनिया पर राज करेगी.जो कार्यकर्ता शासक वर्ग के इस प्रोपगेंडा का शिकार नही होते उन्हें खरीदने के लिए बड़े-बड़े इनाम घोषित कर रहा है.लेकिन हमें नही भूलना चाहिए कि शासक वर्ग हमे कमजोर करने के लिए हमारे अंदर मौजूद सर्वहारा विरोधी ( जो निजी संपत्ति को बचाए रखना चाहता है ) भावनाओं का भी सहारा लेता है. जिसके कारण अनेक निम्न-पूंजीवादी सोच रखने वाले कार्यकर्ता शासक वर्ग की भावनाओं का शिकार हो जाते हैं.वे अपने आप को दिखाते को शोषित वर्ग के पक्ष में है लेकिन हकीकत में वे शासक वर्ग की भावनाओं द्वारा द्वारा चलाए जाते हैं.ये सब समाज मे आज से शुरू नही हुआ है बल्कि हजारों साल से हो रहा है. जब 1905 में रूस में बुर्जुआ जनवादी क्रांति असफल हुई तो बोल्शेविक पार्टी में भी शासक वर्ग की विचारधारा की सेवा करने वाले अनेक संसोधनवादी सामने आए.जिन्होंने न सिर्फ शासक वर्ग की विचारधारा की सेवा की बल्कि बोल्शेविक पार्टी में अनेकों बार तोड़-फोड़ करने की कोशिश की. जिसमे वे एक समय के लिए तो सफल हुए लेकिन अंत मे उन्हें हार का ही मुँह देखना पड़ा व सर्वहारा वर्ग का नेतृत्व करने वाली पार्टी को जीत मिली. कार्यकताओं के पतित होने से क्रांति के ज्वार में ठहराव तो आ सकता है लेकिन वैज्ञानिक साम्यवाद को आने से नही रोका जा सकता. साम्यवाद की जीत तय है इस हकीकत को कोई नही बदल सकता.
हमारे इलाके में भी शोषित वर्ग से गद्दारी करने वाला एक कार्यकर्ता सुमित देवडू हैं. जिसका राजनीतिक पतन व जनताविरोधी चरित्र इस प्रकार है -
अवसरवादी-विघटनवादी-संसोधनवादी सुमित राजनीतिक रूप से पतित कैसे है.
1 दर्शनशास्त्र के रूप में- सुमित का दर्शनशास्त्र हेगल और फायरबाग का दर्शनशास्त्र है जिसके अनुसार हर चीज के दो पहलू है लेकिन प्रधान पहलू कोनसा है ये पता नही होता है ( हीगेल का सिद्धांत ). अपनी विघटनकारी जरूरत के हिसाब से प्रधान पहलू को गौण ओर गौण पहलू को प्रधान पहलू बनाते हैं. इसके साथ ही परिस्थितियों के अनुसार कार्य करने की जीवनशैली अपनाते हैं.यह फायरबाख के सिद्धांत के अनुसार परिस्थितियों का गुलाम होना है. विघटनकारी ओर संसोधनवादी सिद्धान्तों का प्रयोग मार्क्सवाद का नकाब ओढ़ कर करते हैं. इसलिए यह दर्शनशास्त्र में संसोधनवाद है.
2. राजनीतिक अर्थशास्त्र - सुमित मजदूरों को आर्थिक संघर्ष तक ही सीमित रखते हैं. मजदूर के राजनीतिक संघर्ष ( राजनीतिक सत्ता पाने की भावना, मजदूरों की शिक्षा-दीक्षा ) पर ध्यान न देना.
3. समाजवाद- सुमित ओर सुमित जैसे तत्वों का समाजवाद सामंती समाजवाद है. जिस प्रकार बड़ा सामन्त छोटे सामन्त पर दया का हाथ रखता है उसी प्रकार ये लोग भी जनसगठन की जरूरत को न समझते हुए भाईचारे को ही केंद्र में रखते हैं. जनसंगठन में एक -दूसरे का साथ देते हुए एक -दूसरे की गलतियां छुपाते है.कामरेड माओ के शब्दों में ये मालूम होते भी सम्बन्धित वयक्ति स्पष्ट रूप से गलत है लेकिन वो पुरानी जान पहचान का है, एक ही इलाके का है, स्कूल दोस्त हैं, घनिष्ठ मित्र हैं, पिरीज़न है या पहले मातहत रह चुका है इसलिए उससे सिद्धांत के आधार पर तर्क न करना बल्कि शांति व मित्रा बनांए रखने के लिए मामले को घिसटते देना या फिर मामले को ऊपरी तौर पर छु देना . उसका पूरी तरह से समाधान न करना जिसे की अच्छे संबंध बने रहे. नतीजे के तौर पर संगठन तथा संबंधित व्यक्ति दोनों को नुकसान पहुचना है. इसका शानदार उदाहरण सुमित ओर सुमित जैसे तत्वों का उदारतावादी - अवसरवादी- विघटनकारी स्वरूप है.
इतना ही नही सुमित अनेक महिला विरोधी यौन मामलों में लिप्त था जो उसने संगठन समेत अपनी पत्नी से छुपाए रखा, आइए सुमित के महिला विरोधी चरित्र के बारे में बताते है. 1. जनसंगठन की महिला साथी के साथ रेप करने की कोशिश करना
2. एक साथी की जीवनसाथी के साथ अतिरिक्त विवाह संबंध में जाना
3. वेश्यावृत्ति में संलिप्त होना
4. एक महिला साथी के साथ अनैतिक रूप से लैंगिक बातचीत में जाना
5.एक साथी की बहन के साथ संबंधों में जाना ( शादी का झूठा वादा करते हुए )
6. चलती ट्रेन में एक किन्नर के साथ लैंगिक संबंध बनाना
7. पुरुषों से अनैतिक रूप से लैंगिक सम्बधों में जाना
8. पेशेवर महिला साथी को कॅरियर बनाने के प्रोत्साहित करना 9. पेशेवर महिला साथी में बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करना 10. एक महिला साथी के साथ संबंध में जाने के लिए अपने चार एकड़ जमीन की शेखी बघारना ( लोभ देना ) 11.इन सभी महिला विरोधी घटनाओं को करते समय अपनी पत्नी को धोखा देना व उसे आज तक भी अपने बारे में न बताना.
कुल मिलाकर आज लगता सुमित का संगठन में आने का एक ही मकसद लगता हैं कि महिला साथियों व पुरुषों को अपनी भोग-विलास की वस्तु समझते हुए उनका शोषण व उत्पीड़न करना. जब उसे ये पता चला है कि अब उसके मंसूबे पूरे होने वाले नही है तो उसने अपने अवसरवादी-विघटनवादी तरीके से संगठन को तोड़ने की कोशिश की.
सुमित द्वारा संगठन में तोड़-फोड़ करने व सांठनिक नियमों को ताक पर रखने की कुछ झलके -
1. उचित कमेटी में अपनी बातों को न रखते हुए मौजूदा नेतृत्व के खिलाफ दुष्प्रचार करना.
2.नेतृत्व से बदला लेने की बात करना
3.संगठन से निकाले गए जनविरोधी तत्व के साथ एकता स्थापित करने के लिए संगठन विरोधी की गई मीटिंग में सक्रिय भागेदारी लेना
4.रेप के मामले में दुरुस्तीकरण अभियान में शामिल न होते हुए मौजूदा साथी ( जिसे दुरुस्तीकरण अभियान चलाना ) को नेतृत्व का भगत बताना
5.रेप के मामले मे दुरुस्तीकरण अभियान में शामिल न होने पर कारण बताओ नोटिस का आज तक जवाब न देना
6. पेशेवर साथियों को कॅरियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करना, सांगठनिक नियमो की अवहेलना करना
7.महिला विरोधी तत्व के खिलाफ की कारवाई को जनता में गलत बताना
8.संगठन में फैसला लेने के सांगठनिक नियम जनवादी केन्द्रीयता का उल्लंघन करते हुए नेतृत्व को तानाशाह बताना
9.संगठन के विशेष बैठक में नेतृत्व के खिलाफ ग्रुप बनाने की कोशिश करना
10.साजिश करके संगठन की उच्च कमेटी में अपने मनपसंद लोगों को भेजना
11.संगठन के विशेष बैठक में लिए गए केंद्रीय कार्यभार की अवहेलना करते हुए कार्यकर्ता में केंद्रीय कार्यभार के खिलाफ प्रचार करना
जनता से अपील -विश्व दृष्टिकोण और हमारी सैद्धांतिक समझ के मुताबिक मार्क्सवाद हमारा मार्गदर्शक है. यह सिद्धांत हमारे व्यवहार के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत है. मार्क्सवाद संसार में सबसे वैज्ञानिक सिद्धांत साबित हुआ है. हमें इसे हमारे देश के ठोस हालात में लागू करना होगा और क्रांति को सफल बनाना होगा. वर्ग संघर्ष का मार्क्सवाद सिद्धांत में प्राथमिक स्थान होगा. इसी तरह प्रत्येक देश में खास समस्या के लिए इस सिद्धांत को लागू करना है. मार्क्सवादी सिद्धांत को विकसित करने के लिए हमे समाज मे मौजूद सभी संशोधनवादियों के खिलाफ संघर्ष करना होगा. ताकि हम समाज मे मौजूद मार्क्सवाद का चोला ओढ़कर बैठे संशोधनवादियों का पर्दाफाश कर सकें. हमारे इलाके में मौजूद अवसरवादी-विघटनकारी-संसोधनवादी सुमित देवडू मार्क्सवाद का चोला ओढ़कर अपनी भोग-विलास को पूरा किया है. मजदूर अधिकार संगठन सुमित के महिला विरोधी, जनता विरोधी, क्रांति विरोधी व संगठन विरोधी व्यवहार के कारण हमारा संगठन सुमित देवडू को संगठन से बर्खास्त करता है और जनता से अपील करता है कि सुमित से अपने सभी प्रकार के दोस्ताना संबंधों को तोड़ दे.
जारीकर्ता-मजदूर अधिकार संगठन
संपर्क सूत्र-9053887470