03/04/2022
इस तस्वीर में आप एक टमाटर के पौधे को देख रहे होंगे , शायद किसी यात्री ने टमाटर के बीज को ट्रेन से फेंक दिया होगा । ये पौधा मिट्टी की छाती फाड़कर नही बल्कि पत्थरों को चीरकर बाहर आया है । जब ये ओर भी नन्हा सा होगा , तब शताब्दी ओर राजधानी जैसे तूफान से भी तेज दौड़ती ट्रेनों के बिल्कुल पास से गुजरते हुए भी इसने सिर्फ बढ़ना सीखा ओर बढ़ते - बढ़ते आखिर कार इसने एक टमाटर को जन्म दे ही दिया । इस पौधे के न हाथ है , न पांव , न ही दिमाग है , ओर तो ओर इसको जीवित रहने के लिए कम से कम मिट्टी और पानी तो मिलना चाहिए ही था , जो इसका हक भी था । लेकिन इस पौधे ने बिना जल , बिना मिट्टी के बिना की सुविधा के अपने आपको बड़ा किया और फला फूला , ओर जो इस पौधे के जीवन का उद्देश्य एक ओर फल को देना था , वो उद्देश्य इसने पूरा किया । हम इंसानों के पास तो हाथ है , पांव है , दिमाग है , उसके बाद भी यदि हम जीवन मे अपने आपको कमजोर मानकर , जीवन को सही प्रकार से , जो हमारे जीवन का उद्देश्य है , इस प्रकार से नही जीते है तो इस जीवन में आने का कोई औचित्य बचता ही नही है । जिन लोगो को लगता है कि जीवन मे हम तो असफल हो गए हम तो जीवन में कुछ कर ही नही सकते , हम तो बस अब बरबाद हो चुके है , तो उन्हें इस टमाटर के पौधे से कुछ सीख लेनी चाहिए । असली जीवन का नाम ही लगातार संघर्षों की कहानी है Iयदि हम जीवन में अपने आपको कमजोर मानकर , जीवन को सही प्रकार से , जो हमारे जीवन का उद्देश्य है , इस प्रकार से नही जीते है तो इस जीवन में आने का कोई औचित्य बचता ही नही है । जिन लोगो को लगता है कि जीवन मे हम तो असफल हो गए हम तो जीवन में कुछ कर ही नही सकते , हम तो बस अब बरबाद हो ही चुके है , तो उन्हें इस टमाटर के पौधे से कुछ सीख लेनी चाहिए । असली जीवन का नाम ही लगातार संघर्षों की कहानी है |