09/11/2023
मिर्च की इतनी वैराईटी देख मन खुश हो गया । मां की याद आई । उनके खाने में आग में सेका हुआ मिर्च अवश्य होता था । फिर अपना बचपन याद आया - रगड़ा चटनी । लहसुन और हरा मिर्च का चटनी । आह । दिन में चावल दाल के साथ रगड़ा चटनी ।
मेरे ससुराल में मिर्च की जबरदस्त खेती होती है। अजीब किसान है - मंगरैला , सौंफ , मिर्च यही सब की खेती । लेकिन उनके हाता में सूखते लाल मिर्च अच्छे लगते थे। मेरे अनुज है - बॉबी बाबू , बिहार पीसीएस ऑफिसर है । आ गए नोएडा - सन 2004 में , बोले - भाई जी , आज मटन हम बनाएंगे । हरा मिर्च और लहसुन का जबरदस्त पेस्ट बनाए और मटन बनाते बनाते गरम मसाला डालना भूल गए । हा हा हा ।
मिर्च के बारे में कहा जाता है - जो जितनी छोटी , वो उतनी ही तीखी । अब लोग अपने गमले में मिर्च लगाने लगे हैं । हम कभी बाज़ार गए तो सब्जी विक्रेता से पूछते है - यह मिर्च कितनी तीखी है । उसने कहा - बहुत तीखा । हम बोलते है - रहने दो । हा हा हा । अब बताइए - मिर्च की विशेषता तो इसी में है न ...वो कितनी तीखी है ।
हम मिर्च का आँचार बढ़िया बना लेते है। एक हॉर्लिक्स का खाली बोतल / डब्बा लीजिए । उसको दे सर्फ ..दे सर्फ बढ़िया से साफ कीजिए । फिर हरे मिर्च का पेट हल्का काट के उसको उस डब्बे में डालिए । दो चार नींबू को काट कर उसमे डालिए । फिर थोड़ा अदरक । धूप में पांच छह दिन सूखा दीजिए । मस्त सेक्सी हरे मिर्च का अंचार तैयार । दाल भात पर मस्त खाइए ।
कभी कभी सोचते हैं - नौकरी चाकरी नहीं रहेगा तो मिर्च का अचार बना के बेचेंगे । घर घर - दिन में , क्यूट बोईयाम में , साइकिल पर लटका के ।
हा हा हा ... अब किसान परिवार से आते हैं तो यहीं सब न फोटो डालेंगे ।
खैर , आज भी प्रतिदिन मेरे मुख्य भोजन में एक हरा मिर्च अवश्य होता है ।
~ रंजन / दालान / 02.11.2019