10/01/2024
The Forest Resorts Resham Singh in Katarniaghat wild life Century एक साल बाद पर्यटकों के लिए खुली बहराइच in Katarniaghat wild life Century कतर्नियाघाट घाट सेंचुरी, जानें क्या है यहां की खासियत
बहराइच: उत्तर प्रदेश के जिले बहराइच में स्थिति कतर्नियाघाट वाइल्ड लाइफ सेंचुरी को एक साल के बाद आज से फिर पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। अब यह 15 जून तक खुला रहेगा और पर्यटक आकर यहां का आनंद ले सकते है। 551 वर्ग किलोमीटर में फैले इस कतर्नियाघाट में कदम-कदम पर जानवरों की टोलियां दिख जाती हैं। गाड़ी की आवाज सुनकर भागता हिरणों का झुंड, दूर पर बाघ की गुर्राहट, पानी से मुंह ऊपर निकाले मगरमच्छ जैसे कई जानवर हो जो अपनी पहचान के लिए जाने जाते है। इस सेंचुरी के अंदर 8 हजार चीतल, 89 तेंदुए, 55 सांभर, 2800 नीलगाय, 30 बाघ, 9 हजार लंगूर, 110 डाल्फिन, 600 घड़ियाल, 300 काकड़, 12 गैंडे, 85 बारहसिंहा, 80 जंगली हाथी, 2 पालतू हाथी, 80 घड़ियाल, मगरमच्छ, मोर, बंदर और 6 हजार जंगली सुअर हैं।
ऑनलाइन बुकिंग The Forest Resorts Resham Singh in Katarniaghat wild life Century में रुकने के इंतजाम
कतर्नियाघाट सेंचुरी पर गेरुआ नदी में उछाल मारने वाली गैंजाइटिक डाल्फिन, मगरमच्छों और घड़ियालों के परिवार जाड़े में गेरुआ नदी के रेतीले टीलों पर धूप सेंकते नजर आएंगे। दूसरी ओर सांभर, पाढ़ा, बारहसिंहा, नीलगाय, हिरन, कांकड़ और लंगूरी बंदरों के झुंड खेलता नजर आएगा। इसके अलावा यहां पर सैर करने के लिए ऑनलाइन बुकिंग भी कर सकते हैं।
ऑनलाइन बुकिंग कराने के लिए वेबसाइट www.reshamsinghresort.com पर भी जा सकते हैं। बुकिंग के अलावा अतिथि गृहों में आरक्षण के लिए बहराइच स्थित वन विभाग के डिवीजन कार्यालय पर एप्लीकेशन देनी होती है।
जीप में सैर करने के साथ पर्यटक कर सकते हैं खरीददारी
जंगल में रुकने के साथ-साथ पर्यटकों को बंद जीप में पूरे जंगल की सैर कराई फिर तीन से चार घंटे की सैर के बाद उन्हें वापस मुख्य द्वार पर छोड़ दिया जाता है। जो पर्यटक यहां रुकने के लिए आते हैं, उनको जंगल की सैर के बाद बुकिंग हाउस में छोड़ दिया जाता है। जंगल के बीच बने मकानों में अंधेरा होते ही बोन फायर इसके अलावा ऑर्डर पर स्पेशल फूड भी सर्व किया जाता है। यहां पर बच्चों के मनोरंजन के लिए पालतू हाथी भी यहां पर है। सुबह-शाम बोटिंग के लिए मोटरबोट सर्विस भी है। यहां की खास बात यह है कि यहां घूमने आए पर्यटक खरीददारी भी कर सकते हैं। कतर्नियाघाट की सीमा से लगे गांवों में 40-45 परिवार रहते हैं। जिसमें से पुरुष खेती करते है या फिर मजदूरी करते हैं। वहीं महिलाएं हाथ से सामान बनाकर यहां बेचती हैं जैसे-शेर, मोर, हाथी, बंदर इत्यादि। इसका मुख्य कारण सिर्फ यहीं है कि गांव के लोगों को रोजगार से जोड़ा जा सके। यहां पर सुबह-शाम बोटिंग की भी व्यवस्था है।
आपको बता दें कि कतर्निया घाट कभी रेलवे स्टेशन था। शहर के पास बसे गोंडा की ओर से छोटी लाइन की गाड़ी का आखिरी स्टेशन था। यह पूरा नक्शा तब बदला जब गिरिजापुरी के पास नदी पर सड़क और रेलपुल बन गया। Visit - www.reshamsinghresort.com
कर्तनियाघाट वाइल्डलाइफ में खूबसूरत रिसोर्ट खुल गया है| जहां आपके हर रूम से कर्तनिया रेंज की खूबसूरत लोकेशन के साथ ...