11/05/2020
सलाम और मूसाफहा की तरह ही मुसलामानों का एक दूसरे से मिलते वक़्त मुआनिका यानी गले मिलना भी सुन्नत और इज़हारे मुहब्बत व मुसर्रत का तरीक़ा है,
हदिसे पाक में है कि अल्लाह के प्यारे रसूल ने हज़रत उस्माने गनी से मुआनिका किया और फ़रमाया : मैंने अपने भाई उस्मान से मुआनिका किया, तुम में से जिसका कोई भाई हो उसे चाहिए कि अपने भाई से मुआनिका करे |
दुनिया में सबसे पहले हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने मुआनिका फ़रमाया |
मुस्लमान पूरा एक महीना अल्लाह के हुक्म पर अमल करते हुए दिन को रोज़ा और रात को तरावीह जैसी सख्त इबादत करते हैं, इस मुश्किल तरीन इबादत को अंजाम तक पहुंचाने की ख़ुशी में ईद यानी ख़ुशी की नमाज़ पढ़ते हैं और आपस में इस ख़ुशी को बाँटते हुए एक दूसरे के गले मिलते हैं|
यह मुआनिका यानी एक दूसरे से गले मिलना कोई फर्ज या वाजिब नहीं ब्लकि सुन्नत है अगर करेंगे तो सवाब मिलेगा नहीं करेंगे तो कोई गुनाह नहीं|
करोना महामारी की वजह से मौजूदा हालात इस बात की इजाजत नहीं देते कि हर एक से गले मिल कर ईद की मुबारकबादी दी जाए, ऐसे में मुसलामानों को चाहिए कि अपने घर वालों के इलावा दूसरों को सिर्फ़ जबानी मुबारक बादी दें और शारीरिक दूरी बनाए रखें |
*मुफ्ती अब्दुर्रहीम नश्तर फारूक़ी*
मरकज़ी दारूल इफ्ता, दरगाह आला हज़रत, बरेली शारीफ