30/07/2026
#पत्तल #में #भोजन #के #अद्भुत #लाभ
हमें यह जानकर आश्चर्य होगा कि हमारे देश मे प्राचीन काल से 2000 से अधिक वनस्पतियों की पत्तियों से तैयार किये जाने वाले पत्तलों ओर उनसे होने वाले लाभों के विषय मे पारम्परिक चिकित्सकीय ज्ञान उपलब्ध था लेकिन अब मात्र चार-पाँच प्रकार की वनस्पतियों का प्रयोग ही हम पत्तलों के निर्माण में करते हैं।
दक्षिण में केले की पत्तियो मे भोजन परोसा जाता है। प्राचीन ग्रंथों मे केले की पत्तियो पर परोसे गये भोजन को स्वास्थ्य के लिये लाभदायक बताया गया है। आजकल महंगे होटलों और रिसोर्ट मे भी केले की पत्तियों का यह प्रयोग होने लगा है। केले के पत्तल में भोजन करने से चांदी के बर्तन में भोजन करने का आरोग्य मिलता है ।
अभी सुपारी के पत्तों से बनाई गई प्लेट, कटोरी व ट्रे बनाए जाने लगे जिसे प्लास्टिक, थर्माकोल के विकल्प में उतारा गया है क्योंकि थर्माकोल व प्लास्टिक के उपयोग से स्वास्थ्य को बहुत हानि पहुँच रही है ।
पलाश के पत्तल में भोजन करने से स्वर्ण के बर्तन में भोजन करने के समान लाभ व आरोग्य बताया गया है। रक्त की अशुद्धता के कारण होने वाली बीमारियों के लिये पलाश से तैयार पत्तल को उपयोगी माना जाता है। पाचन तंत्र सम्बन्धी रोगों के लिये भी इसका उपयोग होता है। आम तौर पर लाल फूलो वाले पलाश को हम जानते हैं पर सफेद फूलों वाला पलाश भी होता है। इस दुर्लभ पलाश से तैयार पत्तल को बवासिर (पाइल्स) के रोगियों के लिये उपयोगी माना जाता है।
जोडो के दर्द के लिये करंज की पत्तियों से तैयार पत्तल उपयोगी माना जाता है।
लकवा (पैरालिसिस) होने पर अमलतास की पत्तियों से तैयार पत्तलो को उपयोगी माना जाता है।
पत्तलों से अन्य लाभ :
1. सबसे पहले तो उसे धोना नहीं पड़ेगा, इसको हम सीधा मिटटी में दबा सकते है l
2. न पानी नष्ट होगा l
3. न ही कामवाली रखनी पड़ेगी, मासिक खर्च भी बचेगा l
4. न केमिकल उपयोग करने पड़ेंगे
5. न केमिकल द्वारा शरीर को आंतरिक हानि पहुंचेगी
6. अधिक से अधिक वृक्ष उगाये जायेंगे जिससे कि अधिक आक्सीजन भी मिलेगी व प्रदूषण भी घटेगा
7. सबसे महत्वपूर्ण जूठे पत्तलों को एक जगह गाड़ने पर, खाद का निर्माण किया जा सकता है एवं मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को भी बढ़ाया जा सकता है
8. पत्तल बनाने वालों को भी रोजगार प्राप्त होगा l
9. नदी, बांध, तालाब, खेत को दूषित होने से बचा सकते हैं, जैसे कि हम जानते ही हैं कि जो पानी बर्तन धोने में उपयोग कर रहे हैं वो केमिकल वाला पानी, पहले नाले में जाता फिर आगे जाकर नदी - बांध में जाता है
आजकल भंडारे, विवाह, वर्थडे पार्टियों में डिस्पोजल की जगह इन पत्तलों का प्रचलन हो रहा है ।