02/10/2026
दो घंटे युद्ध और चलता तो भारत की सेना लाहौर तक कब्जा कर लिया होता
तभी पाकिस्तान को लगा कि जिस रफ्तार से भारतीय सेना आगे बढ रही है ऐसे तो हमारा तो अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा।
तब पाकिस्तान ने अमेरिका को कहा कि वो किसी तरह युद्ध रुकवा दे परन्तु अमेरिका जानता था कि शास्त्री जी मानने वाले नही है। क्योंकि वो पहले भी धमकी दे चुका है
धमकी कैसे दी:-
अमेरिका से गेंहू आता था PL48 के तहत, PL48 क्या है Public Law 48, जैसे भारत मे संविधान मे धाराएं है वैसे वहा PL है
PL48 के तहत लाल रंग का सड़ा हुआ गेहूं आता था। ये समझौता पंडित नेहरू ने किया था।
जिस गेंहू को अमेरिका मे जानवर भी नही खाते थे उसे भारत मे जनता के लिए आयात किया जाता था।
तो अमेरिका ने धमकी दी की हम भारत को गेंहू देना बंद कर देंगे तो शास्त्री जी ने कहा हा कर दो कुछ दिन बाद अमेरिका का बयान आया कि हम गेंहू देना बंद कर देंगे तो भारत के लोग भूखे मर जायेंगे।
शास्त्री जी ने कहा कि हम भूखे मरे या बहुत खा कर आपको क्या तकलीफ है बशर्ते आप के गेंहू से तो हम भूखे मरना ही पसंद करेंगे एक तो हम पैसा भी पुरा दे और गेंहू भी सड़ा हुआ नही चाहिए हमे आपका गेंहू।
फिर रामलीला मैदान मे शास्त्री जी ने लाखो लोगो को संबोधित करते हुए कहा कि फालतू खर्चे बंद कर दो पाकिस्तान के साथ युद्ध चल रहा है इसलिए सेना के लिए दान करे और सोमवार को व्रत रखे और खुद शास्त्री जी भी सोमवार का व्रत रखते थे जिससे देश का अनाज बचे लाखो लोगो ने व्रत रखना शुरू कर दिया।
शास्त्री जी ने अपने घर पर काम वाली को हटा दिया और कहा कि मै इतना खर्चा नही कर सकता घर का काम मै खुद कर लूँगा क्योंकि पत्नी ललिता देवी बीमार रहती थी और कपड़े भी मै धो लूंगा उनके पास दो धोती कुर्ता थे।
एक दिन शास्त्री जी की पत्नी ने कहा कि आपकी धोती फट गई है नई धोती ले आओ तो शास्त्री जी ने कहा कि बेहतर होगा कि आप सुई धागा लेकर इसे सील दो मै नई धोती लेने की कल्पना भी नही कर सकता मैंने पगार लेना भी बंद कर दिया और आप भी घर का खर्चा कम से कम मे चलाओ।
अंत मे युद्ध के बाद शास्त्री जी समझौते के लिए ताशकंद गये और वहा से वो कभी वापस जिंदा नही आये लोगो को कहा गया कि उनकी मृत्यु हो गई परन्तु उनकी हत्या हुई थी।
वह ऐसे प्रधानमंत्री हुए है जिनको 1965 मे कार खरीदने के लिए पंजाब नेशनल बैंक से पांच हजार रुपये का ऋण लेना पड़ा और उनकी मृत्यु के बाद उनके घर बैंक का नोटिस आया तब पत्नी ललिता देवी ने अपने पेंशन के पैसे से ऋण अदा करने का वादा किया।
हम बात कर रहे है लाल बहादुर शास्त्री जी की
आज के युग मे ऐसे नेता की कल्पना भी नही की जा सकती
आज उनकी जयंती पर उनको कोटि-कोटि नमन