Maa Ki Rasoi

Maa Ki Rasoi घर जैसा भोजन करने का प्यार मात्र "मां क?

30/10/2024

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अक्सर किसान और गरीब का बच्चा आज भी मिट्टी में खेलता है तबियत खराब नहीं होती क्योंकि वो इस मिट्टी से अपनी इम्यूनिटी पावर ...
08/06/2023

अक्सर किसान और गरीब का बच्चा आज भी मिट्टी में खेलता है तबियत खराब नहीं होती क्योंकि वो इस मिट्टी से अपनी इम्यूनिटी पावर मजबूत करता है। गांव के महिलाओं-पुरुषों को सामान्यतः गम्भीर बिमारी नहीं होती जबकि शहर के लगभग प्रत्येक व्यक्ति बीमार है। हार्ट, लीवर आदि की बिमारी से ग्रसित है या नहीं पाठक तय करें।
आप जानते हैं भारत की आत्मा गांवों में बसती है। पहले मिट्टी या पीतल, एल्यूमिनियम या अन्य पतीले (खुला बर्तन) में दाल-भात बनता था, अदहन (पहली बार में पात्र में डाला गया पानी) जब अनाज के साथ उबलता था तो बार-बार गांज/झाग ( एक मोटे झाग की परत) पतीले के चारों तरफ जमा हो जाया करती थी/है। जिसे माई (मां/अम्मा/मम्मी) रह-रह के पल्ले से निकाल के फेक दिया करती थी। पूछने पर कहती कि इसका ऐ खराब कचड़ा है "इससे तबीयत ख़राब हो जाएगी।
बाद में बड़े होने पर पता चला इसी झाग से शरीर मे यूरिक एसिड बढ़ता है और अम्मा इसीलिए वो झाग फेंक दिया करती थी। आप और हमारी अम्मा ज्यादा पढ़ी लिखी तो नही रही थी पर ये चीज़े उन्होंने नानी से और नानी ने अपनी माँ से सीखा था। जबकि अब आजादी के बाद हुए वैज्ञानिक खोज और शोध के बाद ऐ पता चल रही हैं।
पहले या आज हम जानवरों को देखते है कि उनकी हाजमा या तबियत खराब होती है तो घास खाने लगते हैं उनको तक को पता है फाईवर है, सुबह किसान कुदाल ले कर खेत कोड़ (खोदना) आता था और खेत के कंद-मूल को खा लेता था । और हम आज पार्क में कैलोरी वर्न करते हैं फिर घारफूस का जूस पीते हैं। कूकर में दाल-भात बनता है, पता नही झाग कहा जाता होगा, ज्यादा दाल खाने से पेट भी खराब हो जाते हैं। डॉक्टर कहते हैं एसिडिटी है। पुराने ज्ञान को याद करिये विज्ञान छुपा है। प्रकृति के तरफ लौटिए और Maa Ki Rasoi® Maa Ki Rasoi® को याद करिए और वापस स्वस्थ तन-मन के तरफ लौटिए।

अब आपको एक फोन पर "मां की रसोई" का या घरका बना खाना भी आपके पास देने की तैयारी है। भविष्य में बड़ा बदलाव देखने को मिल सक...
12/03/2020

अब आपको एक फोन पर "मां की रसोई" का या घरका बना खाना भी आपके पास देने की तैयारी है। भविष्य में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

हमारे पास "मां की रसोई" का ट्रेडमार्क है। कृपया फेसबुक में भी सम्पर्क कर सकते हैं। या मेल करें- maakirasoiindia@gmail.co...
13/02/2020

हमारे पास "मां की रसोई" का ट्रेडमार्क है। कृपया फेसबुक में भी सम्पर्क कर सकते हैं। या
मेल करें- [email protected]

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H. O/229/28E, Railway Colony Mandawali, Maa Ki Rasoi, FF-6, Near Dena Bank, Mangal Bazaar, Laxminagar
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