11/07/2026
जहाँ साहस को गति मिली, वहाँ अश्व थे। जहाँ स्वाभिमान ने इतिहास रचा, वहाँ अश्व थे। और जहाँ निष्ठा ने अमरत्व पाया, वहाँ भी अश्व ही थे।
हजारों वर्षों से अश्व केवल यात्राओं के साथी ही नहीं, बल्कि मानव के संघर्ष, विजय और जीवन-यात्रा के मौन सहभागी रहे हैं। मनुष्य और अश्व का संबंध विश्वास, समर्पण और आत्मीयता का ऐसा अनुपम बंधन है, जो समय के साथ और भी गहरा होता जाता है।
स्वयं को उस गौरवशाली परंपरा का हिस्सा मानना परम सौभाग्य है, जहाँ अश्वों का पालन-पोषण केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि श्रद्धा, सेवा और विरासत का पावन दायित्व है। भारतीय संस्कृति में अश्व सदैव शौर्य, मर्यादा, स्वाभिमान और गौरव के जीवंत प्रतीक रहे हैं।
विश्व अश्व दिवस के पावन अवसर पर आइए, इन निष्ठावान, गौरवशाली और अद्भुत साथियों के प्रति अपना सम्मान, स्नेह और कृतज्ञता व्यक्त करें। 🐎🤍
क्या आप उस अमर अश्व का नाम जानते हैं, जिसने हल्दीघाटी के रण में अपनी स्वामिभक्ति, साहस और अंतिम श्वास तक समर्पण का परिचय देते हुए वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप को सुरक्षित स्थान तक पहुँचाया था?
For over 4,000 years, horses have enriched humanity's journey with their courage, grace and unwavering loyalty.
The bond between a horse and its human is one of the purest relationships, built on trust, understanding and companionship. True horsemanship is giving these magnificent beings a life of dignity, comfort and love.
One feels deeply blessed to belong to a legacy where breeding and rearing horses is a sacred responsibility. In our culture, horses are admired and revered.
On World Horse Day, let us celebrate these noble companions. 🐎🤍
Which famous horse bought Veer Shiromani Maharana Pratap to safety in the battle of Haldighati?
Description Courtesy of - Shriji Huzur Dr. Lakshyaraj Singh Mewar
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