10/03/2026
**KRM Group ग्रुप क्या है? और शुरुआत कैसे हुई?**
यह कहानी केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि संघर्ष, अटूट विश्वास और देशभक्ति की उस मिसाल की है जिसने **KRM Group** की नींव रखी।
# # आज़ाद हिंद का सिपाही: एक अनसुना संघर्ष
यह बात उस दौर की है जब भारत की हवाओं में इंक़लाब गूंज रहा था। हमारे दादाजी, **श्री कांशी राम जी**, उन विरले नायकों में से थे जिन्होंने अपनी जवानी देश के नाम कर दी थी। वे **नेताजी सुभाष चंद्र बोस** की 'आज़ाद हिंद फ़ौज' (INA) के एक निष्ठावान सिपाही थे। जब नेताजी ने "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा" का आह्वान किया, तो दादाजी ने बिना पीछे मुड़े अपनी सेवाओं से मां भारती के चरणों में सर्वस्व अर्पित कर दिया।
लेकिन देशभक्ति की राह फूलों की सेज नहीं थी। युद्ध के उतार-चढ़ाव के बीच उन्हें बंदी बना लिया गया। रंगून की उन काली और सीलन भरी जेलों में उन्होंने अनगिनत साल बिताए। वह समय ऐसा था जहाँ समय थम गया था; न बाहर की दुनिया की खबर थी, न अपनों की। वे जीवित भी हैं या नहीं, यह एक ऐसा प्रश्न था जिसका उत्तर उस समय किसी के पास नहीं था।
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# # जानकी देवी: धैर्य और ममता की मूरत
एक तरफ सीमा पर दादाजी का संघर्ष था, तो दूसरी तरफ घर के मोर्चे पर हमारी दादी, **जानकी देवी जी** एक अलग ही जंग लड़ रही थीं। उन्हें 'नारी शक्ति' का जीवंत उदाहरण कहना गलत न होगा।
* **अटूट विश्वास:** समाज और समय ने मान लिया था कि शायद श्री कांशी राम जी अब कभी लौटकर नहीं आएंगे, लेकिन दादी का ईश्वर पर विश्वास और अपने सिंदूर पर भरोसा अडिग था।
* **अकेला संघर्ष:** उन्होंने घोर आर्थिक तंगी और बदहाली के उन दिनों में, जब न ही दो वक्त की रोटी का कोई पक्का साधन न रहने का ठिकाना सुरक्षित था, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। अकेले हमारे पिताजी (श्री अमी चंद जी) का पालन-पोषण किया।
* **संस्कारों की नींव:** अभावों के बीच भी उन्होंने हमारे पिता को सिद्धांतों और मेहनत की सीख दी, , post graduation तक उन्हें पढ़ाया, बाद में जिन्होंने हिमाचल प्रदेश के शिक्षा विभाग में अपनी सेवाएं दी, जो आज भी हमारे ग्रुप का मूल मंत्र है।
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# # शून्य से शिखर तक: KRM Group का उदय
सालों बाद, जब दादाजी रंगून की सलाखों से आज़ाद होकर लौटे, तो वह मिलन केवल एक परिवार का मिलन नहीं था, बल्कि दो महान संघर्षों का संगम था। एक कांशी राम जी का राष्ट्र के प्रति त्याग और दूसरा जानकी देवी जी का परिवार के प्रति समर्पण।
उनकी उसी तपस्या, आशीर्वाद और कठिन परिश्रम के बीज से आज **KRM Group** का विशाल वटवृक्ष खड़ा है। हमारे लिए KRM सिर्फ एक व्यापारिक संस्थान नहीं है, बल्कि दादाजी के 'अनुशासन' और दादी के 'धैर्य' की विरासत है। आज हम जो भी हैं, उन्हीं की कुर्बानियों और ईश्वर के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा का फल है।
"इतिहास गवाह है कि महान साम्राज्य महलों में नहीं, बल्कि संघर्ष की उन झोपड़ियों में जन्म लेते हैं जहाँ इरादे फौलादी हों।"
KRM Family
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