पंडित नौबत राय - पितृ धाम

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पंडित नौबत राय - पितृ धाम पंडित अमित राय गौतम , पंडित गौरव राय गौतम +917417481347 , +9198973 27515

गले में नाग, भस्म का चोला, रुद्र का जिनका रूप है,गंगाधर हैं, नीलकंठ हैं, जिनसे चलता हर स्वरूप है।चंद्र जिसे मस्तक पर धार...
26/02/2025

गले में नाग, भस्म का चोला, रुद्र का जिनका रूप है,
गंगाधर हैं, नीलकंठ हैं, जिनसे चलता हर स्वरूप है।
चंद्र जिसे मस्तक पर धारे, मन को शीतल कर जाए,
डमरू की ध्वनि जब गूंजे, सृष्टि का हर कण थर्राए।
कैलाश के वासी, सृष्टि के त्राता,
गंगा को जिसने सिर पर है धाता।
नीलकंठ बन विष को पिया,
भक्तों को जिसने अमृत दिया।
वो भोलेनाथ है मेरा|
शिव शंकर है काल के स्वामी,
महाकाल, त्रिपुरारी नामी।
गंगाधर, नीलकंठ कहाए,
चंद्रमा जिनके मस्तक सुहाए।
जो सच्चे मन से शिव को ध्याए,
उसके सारे कष्ट मिट जाएं।
जय हो शिव शंकर भोले की,
हर हर महादेव बोले की!
महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं|

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सभी प्राणियों के मन का नियंत्रण चन्द्रमा के द्वारा किया जाता है।
चन्द्रमा की उत्पत्ति ऋषि अत्री और देवी अनसुईया से फाल्गुन मास की पूर्णिमा को हुई थी।
चन्द्रमा मन में विचार उत्पन्न करता है, मनुष्य के उत्थान-पतन का कारण मानव मन ही है, जो चन्द्रमा के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए फाल्गुन मास में चन्द्रमा का उपाय, शिव जी की पूजा और होलिकोत्सव मन की विकृतियों से व्यक्ति की रक्षा करती है। फाल्गुन मास में मन की चंचलता पर नियंत्रण के लिए विधि-विधान बनाए गए हैं। फाल्गुन मास में भगवान श्रीकृष्ण, भगवान विष्णु, मां जानकी, भगवान शिव के साथ-साथ चन्द्रदेव की पूजा का विशेष महत्व होता है। फाल्गुन मास के दौरान कई त्योहार मनाए जाते हैं जिसमें होली, महाशिवरात्रि, फुलेरा दूज, फाल्गुन पूर्णिमा, फाल्गुन अमावस्या और आमलकी एकादशी प्रमुख हैं।
फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी विजया एकादशी कहलाती है। मानसिक संताप दूर करने एवं सात्विकता बनाए रखने के लिए विजया एकादशी का व्रत रखने की परम्परा है।
फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी महाशिवरात्रि के रूप में मनाई जाती है। शिव के प्रति समर्पण भाव करने हेतु एवं मन की शुद्धि एवं पापों के विनाश हेतु महाशिवरात्रि व्रत रखा जाता है।
फाल्गुन कृष्ण पक्ष की अमावस्या फाल्गुनी अमावस्या कहलाती है। यह अमावस्या पितरों को मोक्ष देने वाली होती है, इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है।
फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी आमलकी एकादशी कहलाती है। शत्रुओं पर विजय एवं दुखों से मुक्ति के लिए आमलकी एकादशी का व्रत रखा जाता है।
फाल्गुन मास में होली से 8 दिन पहले होलाष्टक प्रारंभ हो जाता है, होलाष्टक में कोई भी शुभ कार्य नहीं करते। फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी से होलिका दहन तक 8 दिन होलाष्टक तक माने जाते हैं।
फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को होलिकोत्सव मनाया जाता है। बुराई पर भलाई की जीत के लिए होलिका पूजन एवं रंगों का त्यौहार होली मनाया जाता है। इस दिन देवताओं को अबीर और गुलाल अर्पित करना शुभ होता है। भगवान श्रीकृष्ण ने पूतना नामक राक्षसी का वध भी फाल्गुन पूर्णिमा के दिन किया था।
फाल्गुन महातम्य - फाल्गुन मास में जो दान, जप, ब्राहमण पूजन और भगवान विष्णु का पूजन करता है, वह सब पापों से मुक्त होकर इस लोक तथा परलोक में विविध प्रकार के सुखों को भोगता है तथा समस्त पापों से मुक्त हो जाता है।
फाल्गुन मास में शीतल व सामान्य जल से स्नान करना चाहिए तथा स्वास्थ्य लाभ के लिए भोजन में अधिक से अधिक फल का प्रयोग करना चाहिए। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन अट्ठाहस, खिलखिलाहटों और मंत्रोच्चारण से मन में एकत्र सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा को भक्ति की शक्ति के माध्यम से दूर किया जाता है।

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