Hotel midtown haridwar

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28/01/2021

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19/12/2020

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🌸🌸🌺🌺हर हर महादेव 🌺🌺🌸🌸           🌹🙏बम बम भोले 🙏🌹देवघर। हिन्‍दुओं का पवित्र माह सावन शुरू हो गया है। मान्‍यता है कि ये पवि...
09/07/2017

🌸🌸🌺🌺हर हर महादेव 🌺🌺🌸🌸
🌹🙏बम बम भोले 🙏🌹

देवघर। हिन्‍दुओं का पवित्र माह सावन शुरू हो गया है। मान्‍यता है कि ये पवित्र माह भगवान भोलेनाथ को सबसे प्रिय है। पूरे महीने अपने आराध्‍य भगवान शिव का अभिषेक करने के लिए भक्‍तों में होड़ मची रहती है। लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष श्रावण मास में कंधे पर जल से भरे कांवर लेकर और मीलों लंबी पैदल यात्रा करके शिवधाम पहुंचते हैं। इस पवित्र माह में द्वादश ज्‍योतिर्लिंगों का अभिषेक करना बड़ा ही पुण्‍यदायी माना गया है। इनमें भी झारखंड के संताल परगना स्‍थित बैद्यनाथ ज्‍योतिर्लिंग (देवघर) तक की कांवर यात्रा अत्‍यंत फलदायी माना गया है। आइए, जानते हैं श्रावण मास में कांवर यात्रा क्‍यों है महाफलदायी और क्‍यों लाखों शिवभक्त हर साल कंधे पर कांवर लेकर करते हैं बाबा वैद्यनाथ धाम की पवित्र किंतु कठिन यात्रा ?

प्राचीन ग्रंथों के अनुसार रामायण काल में श्रवण कुमार की कथा मिलती है। कथानुसार श्रवण कुमार अपने अंधे माता-पिता को कांवर में बिठाकर तीर्थाटन पर निकले थे। इस दौरान उन्‍होंने बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचकर जलाभिषेक भी किया था। यही नहीं आनंद रामायण के अनुसार भगवान श्रीराम और महाबली हनुमान ने भी सुल्‍तानगंज में गंगा स्‍नान किया था और कांवर में जल भरकर बैद्यनाथ ज्‍योतिर्लिंग का जलाभिषेक किया था।

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सावन माह को शिव की स्तुति के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इस माह में देश के सभी शिवालयों में भक्त शिव की अराधना के लिए पहुचते हैं। सावन माह में सोमवार के दिन का भी विशेष महत्‍व है। मान्‍यता है कि प्राचीन काल में इसी महीने में देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्रमंथन किया था, जिससे 14 प्रकार की वस्‍तुएं निकलीं। इसमें सबसे पहले कालकूट (हलाहल) या विष निकला जिसे देवाधिदेव शिव ने ग्रहण किया। मान्‍यता है कि विष की गर्मी से तप रहे शिव को ठंडा करने के लिए देवताओं ने उनका जलाभिषेक करना शुरू किया। ये प्रथा आज भी परंपरागत रूप में चली आ रही है।
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विशेष होती है शुद्धता 😊

सावन महीने में कांवर यात्रा का महत्व तो है ही लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण है यात्रा की शुद्धता का ध्यान रखना। यात्रा के दौरान खान-पान से लेकर रहन-सहन तक में शुद्धता का विशेष ध्‍यान रखा जाता है। कई भक्त इस दौरान सिर्फ फलाहार पर ही रहते हैं, तो कई अन्न भी ग्रहण करते हैं लेकिन बिना लहसुन-प्याज के। इतना ही नही कांवर यात्रा के दौरान अगर रास्ते में कहीं थकान मिटाने के लिए विश्राम भी करना पड़ता है तो दुबारा स्नान करके ही कांवर यात्रा शुरू की जाती है।
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हर हर महादेव
बम बम भोले
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हरिद्वार, उत्तराखण्ड के हरिद्वार जिले का एक पवित्र नगर, हिंदुओं का प्रमुख तीर्थ और नगर निगम बोर्ड है। यह बहुत प्राचीन नग...
06/07/2017

हरिद्वार, उत्तराखण्ड के हरिद्वार जिले का एक पवित्र नगर, हिंदुओं का प्रमुख तीर्थ और नगर निगम बोर्ड है। यह बहुत प्राचीन नगरी है। हरिद्वार हिन्दुओं के सात पवित्र स्थलों में से एक है। ३१३९ मीटर की ऊंचाई पर स्थित अपने स्रोत गौमुख (गंगोत्री हिमनद) से २५३ किमी की यात्रा करके गंगा नदी हरिद्वार में मैदानी क्षेत्र में प्रथम प्रवेश करती है, इसलिए हरिद्वार को 'गंगाद्वार' के नाम सा भी जाना जाता है, जिसका अर्थ है वह स्थान जहाँ पर गंगाजी मैदानों में प्रवेश करती हैं। हरिद्वार का अर्थ "हरि (ईश्वर) का द्वार" होता है।

मुख जानकारी

* हर की पौरी – हरिद्वार का ये मुख्य आकर्षण है, इसे ब्रह्मकुंड भी कहलाता है. माना जाता है है, विष्णु जी खुद आया करते है, उनके पद चिन्हों को आज भी देखा जा सकता है. यहाँ गंगा जी बड़ा घाट है, इस घाट के पहले गंगा जी पहाड़ियों से नीचे आती हुई ही दिखाई देती है, ये पहला मैदानी स्थान है, जहाँ गंगा जी आती है. कुम्भ मेला व अर्द्ध कुम्भ मेला के समय ये घाट की रौनक देखने लायक होती है, उस समय ये मुख्य घाट हुआ करता है. इस घाट में अस्थि विसर्जन, मुंडन का कार्य मुख्य रूप से किया जाता है.

* चंडी देवी मंदिर – यह मंदिर दुर्गा माता के रूप चंडी का है. नवरात्र व कुम्भ के समय में यहाँ भक्तों का जमावड़ा लगता है. भारत देश में मौजूद माता सती के 52 शक्तिपीठ में से ये एक है. मंदिर की मूर्ती को आदि शंकराचार्य ने बनवाया व स्थापित किया था, लेकिन मंदिर को बनवाया 1929 में कश्मीर के किसी शासक ने था. ये मंदिर नील पर्वत पर स्थित है, जो हरिद्वार से 4 किलोमीटर दूर है, यहाँ गाड़ी, टैक्सी या रोपवे के द्वारा जाया जा सकता है.

* शांति कुंज – देश में सभी जगह फैले गायत्री परिवार का ये मुख्य गढ़ है. इसे 1971 में बनाया गया था. यहाँ आश्रम भी है जहाँ कई तरह की शिक्षाएं दी जाती है.

* माया देवी मंदिर – ये भी 52 शक्तिपीठ में से एक है. इसका निर्माण 11 वी शताब्दी में हुआ था. देवी सती के इस मंदिर की बहुत अत्याधिक मान्यता है, कहते है देवी के शरीर का दिल व नाभि यहाँ गिरा था, जो कोई यहाँ कोई मन्नत मांगता है उसकी मुराद पूरी होती है.

* मनसा देवी मंदिर – यह मंदिर बिलवा पर्वत जो शिवालिक पहाड़ियों में आता है, वहां स्थित है. यह मंदिर हरिद्वार से 3 किलोमीटर दूर है. इस मंदिर में मान्यता मांग कर मंदिर के पास पेड़ में धागा बांधा जाता है, कहते है इससे हर प्राथना पूरी होती है. मान्यता पूरी होने के बाद धागा खोलने के लिए फिर इस मंदिर में जाना जरुरी माना जाता है. इस मंदिर में सिर्फ रोपवे के द्वारा ही जाया जा सकता है, जिसे आम भाषा में उड़नखडोला भी कहते है.

* वैष्णो देवी मंदिर – कश्मीर के कटरा में स्थित वैष्णो देवी का मंदिर जग जग में प्रसिध्य है. उसी मंदिर के जैसे इस मंदिर को बनाया गया है. यह मंदिर भी पहाड़ी में स्थित है, जहाँ जाने के लिए वैष्णो देवी जैसे कठिन चढाई व गुफाओं से होते हुए जाता पड़ता है.

* पावन धाम – यह मंदिर अपने अनोखी व अलग तरह की कलाकृति के लिए जाना जाता है. इस मंदिर में मूर्तियों को कांच व आईने से दिवार पर बनाया गया है. इस मंदिर को 1970 में स्वामी वेदांता जी महाराज के द्वारा बनाया गया था.

* विष्णु घाट – कहते हैं यहाँ स्वयं भवान विष्णु ने स्नान किया था. इस घाट की मान्यता है कि यहाँ नहाने से सारे पाप मिट जाते है. पुरे हरिद्वार में सबसे अधिक लोग इसी घाट में जाते है.

* भारत माता मंदिर – भारत देश का एकलौता ऐसा मंदिर जहाँ भारत माता को मूर्ती के रूप में पूजा जाता है. इस मंदिर का निर्माण 1983 में स्वामी सत्यमित्रानंद द्वारा किया गया था. मंदिर का उद्घाटन इंदिरा गाँधी ने किया था. मंदिर में 8 मंजिल है, हर एक मंजिल में अलग अलग देवी देवता, स्वतंत्रता संग्रामी की मूर्ती व फोटो है, साथ ही यहाँ भारत के इतिहास के बारे में कुछ अनजानी बातें भी पता चलती है. भारतीय इतिहास का यहाँ अच्छा संग्रहालय है.

* दूधाधारी बर्फानी मंदिर – यह मंदिर बर्फानी बाबा के द्वारा उनके आश्रम में बनाया गया था. इस मंदिर को सफ़ेद संगरमर से बनाया गया है, जहाँ सभी देवी देवताओं के मंदिर मौजूद है.

* चिल्ला अभयारण्य – हरिद्वार से 11 किलोमीटर दूर ये अभयारण्य पर्यटकों का मुख्य आकर्षण है. धार्मिक मंदिर से दूर ये प्रकति की सैर कराता है, जहाँ कई तरह जंगली जानवर देखने को मिलते है.
* सप्तऋषि आश्रम – यहाँ सात ऋषि बैठ कर एक साथ तप आराधना किया करते थे. इसे सप्तऋषि कुंड भी कहते है.

* पारद शिवलिंग – इस शिवलिंग 150 किलो का है. यहाँ महाशिवरात्रि में मेला लगता है, यहाँ रुद्राक्ष का पेड़ है, जिसे देखने मुख्य रूप से लोग यहाँ जाते है.
हरिद्वार में धार्मिक शांति के साथ प्रकति के कई रूप देखने को मिलेंगें. यहाँ लोग मन की शांति के लिए जाते है. विदेश से सेनानी यहाँ जाते है, और हिन्दू धर्म में लीन हो जाते है और उसे ही अपना लेते है
🌹🌹🌹💐💐💐
आपका स्वागत है ।🙏🙏🌼🌼
हर हर गंगे माँ🌸🌸🌺🌺

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