Balaji Boys Hostel Sardarpura 8 C Road 9460981447

31/10/2024

आदरणीय मुथा साहब जी के आह्वान से प्रेरित-
आज सूरत में एक तेल की मिल से गुजरते हुए एकदम से विचार आया कि एक दो लीटर शुद्ध मूंगफली का तेल खरीद लिया जाए। मिल में सरसों,तिल, मूंगफली का तेल कई मशीनों से निकला जा रहा था।कुछ मशीने कच्ची घाणी जैसी थी जिसमे लकड़ी का मोटा सा पार्ट लगा था जो लगातार घूम कर तेल मूंगफली को क्रश करके तेल निकाल रही थी। उस तेल की कीमत लगभग 300/-लीटर थी। दूसरी और स्टील की मशीनें थी जिसको Expeller कहते है उसमें प्रेस करके तेल निकल रहा था।उसकी कीमत 200/- लीटर थी।
जब मैंने फैक्ट्री ओनर से दोनों में अंतर पूछा तो उन्होंने विस्तार से बताया कि पहली मशीन में पुराने जमाने की कोल्हू वाली पद्धति से तेल निकलता है जिसका प्रोडक्शन बहुत कम आता है इसलिए ये अपेक्षाकृत थोड़ा महंगा है।
दूसरी मशीन जिसको Expeller कहते है उसमें लगभग 40 से 45 प्रतिशत तक तेल निकलता है और थोड़ा गर्म हो जाता है । इसकी कीमत 100 रुपये तक कम होती है लेकिन गुणवत्ता में बाजार में मिलने वाले बड़ी कंपनियों से कंही ज्यादा होती है।
बाजार में 160 से 180 रुपये में कई कंपनियों का तेल उपलब्ध है पर उसमे 30 से 40 प्रतिशत पाम आयल की मिक्सिंग आती है जो कि भारत सरकार के द्वारा खाद्य तेलों में की जाने वाली मिलावट की छूट को लीगल तौर पर मान्यता प्रदान करती है।पर कई कंपनियां इससे ज्यादा भी मिक्सिंग करके कीमतों को कम करती है।ये तेल ज्यादा फायदेमंद नहीं है।
बाजार के तेल को दो तीन बार फिल्टर किया जाता है और ज्यादा क्लियर बनाने के लिए कुछ केमिकल भी डाले जाते है।
तेल मिल वाले की अनुशंसा पर मैंने 200/-लीटर वाला तेल ही खरीदा क्योंकि उनके अनुसार कच्ची घाणी और कोल्ड प्रेस दोनों की गुणवत्ता लगभग समान ही होती है लेकिन कीमत में 50 प्रतिशत तक ज्यादा बढ़ोतरी होती है। ये तेल एक बार सामान्य कपड़े से फिल्टर किया हुआ है और मेरी आँखों के सामने बना हुआ है।
स्वाद में इतना बढ़िया है और कम मात्रा में लगता है और खाने की खुशबू तो पूछो ही मत!!
अब से हम शुद्ध मूंगफली का तेल ही खाएंगे और बाजार के तेल को ना कह दिया है😋

24/10/2024

शांत ब्राह्मण बालक राम के परशुराम बनने के पीछे मूल कारण गोवंश था।
चित्र को देखो क्या दृश्य रहा होगा,अगर वास्तव में तत्कालीन सम्राट अर्जुन के हजार भुजाओं को काट कर एक ब्राह्मण नवयुवा इस तरह बछड़े को कंधे पे टांगे नगर के राजमार्ग, गांवों की पगडंडियों , जंगल के राहों से गुजर कर आश्रम तक पहुंचा होगा और पीछे पीछे गोमाता हुलस्ती हुई कभी उसके आगे दौड़ते हुए एक जगह ठिठक कर खड़ी हो जाती होगी फिर वापस दौड़कर कभी उसके दाएं कभी बाएं रहकर उसे चाटती होगी तो कभी पीछे पीछे शांति से चलती होगी।
ये उस समय का कालखंड था जब भारत वास्तव में विश्वगुरु होता था। प्रबल राजतंत्र होता था।
फिर भी गोमाता के अपमान पे बड़े से बड़े ताकतवर सम्राट तक यूँ ही पेल दिए जाते थे ।
जिस ब्राह्मण के ऊपर जिम्मेदारी थी समाज को नियंत्रित रखने की वही समाज से विद्रोही हो गया था। समाज के अगुआ के रक्त से गोमाता का अपमान , अपने जनक के अपमान का कीमत वसूला था।
जननी ने 21 बार छाती पिटी 21 बार रक्तपात कर दिया पुत्र ने।

समाज एवं धर्म के ठेकेदारों को आइना दिखा दिया कि ब्राह्मण का काम शंख और गंगाजल तक ही सीमित नही है।
वह नन्दीश्राद्ध के साथ अंत्येषित भी करा सकता है तो अंत्येष्टि होने का कारण भी बन सकता है।
फिर आते हैं श्रीकृष्ण जिन्होंने गौसेवा का ऐसा आदर्श प्रस्तुत किया, जैसा आजतक किसी ने नही किया। त्रिभुवन पति होकर सामान्य ग्वाल बालों के साथ गैया चराये। गोपाल , गोविंद कहलाये।
आज यादव/ अहीर कुल की पहचान ही गायों से है।
क्षत्रिय कुंतीपुत्र अर्जुन ने भी गायो के लिए 12 वर्ष का एकांतिक वनवास स्वीकारा, उसके पहले गायो के लिए ही अज्ञातवास में पहचान छुपा के रखने की चिंता किये बिना राजा विराट की तरफ से अपने ही सगे सम्बन्धियो से भिड़ गया। छुड़ा के ही लाया।

कुछ सौ वर्ष पीछे शिवा जी ने भी गाय के लिये तत्कालीन म्लेच्छ साम्राज्य से विद्रोह कर दिया।
सरदार सुच्चा सिंह , मंगल पाण्डे आदि ने गाय के लिए उस साम्रज्य से सीधी टक्कर ली, जिसके राज्य में सूर्य कभी अस्त नही होता था।
और आज??
ब्राह्मण हो या राजपूत या अहीर ये सब बस डींग हांकते हैं पूर्वजो के नाम पर।
पूर्वजो ने गाय को इतनी महत्ता क्यों दी इसपे सोचने का समय नही है।
अब तो एक ठेकेदार संगठन का अगुआ सामाजिक समरसता के लिए गोमांस की पैरवी तक कर रहा।
सम्भव है ये समरसता के ठेकेदार आगे चलकर अपनी बहन बेटियों को सेक्स मैनियैक लोगो के बिस्तर पे भी लिटा दें।
मां की महत्ता जिसे पता नही ,वह परम पापी कभी बहन बेटी की मर्यादा भी सुरक्षित नही रख सकता।

गाय को पालना धर्म है। उसे बेचकर उसके नाम पे राजनीति करना अधर्म है।
बाकि आश्चर्य जनक कुछ नही है आज के समय में। राजनीति ने धर्म को मार्केटिंग बना कर परोसना सदियों से चालू कर रखा है।
यहां भावना बात बात पे आहत होकर विलाप करती है, किंतु जहां विलाप करना चाहिए वहां अफीम सुंघकर बेहोश पड़ी रहती है।
परशुराम, राम कृष्ण युधिष्ठिर की आलोचना से भावना आहत होती है, पर उनके प्रिय गोवंश के दुर्गति पे नही।
धर्म के खिलाफ बयान पे भावना आहत होती है किंतु धर्म स्वरूप नन्दियो को भाला मारते, डंडे बरसाते , कसाई को बेचते, रोड पे छोड़ते,धर्म की जननी गोमाता को खून के आंसू रुलाते समय आहत नही होती।

एक एक शब्दो पे भयंकर बहस छिड़ जाती है, मूर्ति विसर्जन , शोभायात्रा को लेकर दंगे, धरना हो जाते हैं प्रदर्शन हो जाता है परन्तु बेचारा गोवंश आज भी अपने लिए एक अदद आवाज को तरस रहा है।
अब तो भगवान भी न आ रहे।

सबसे पवित्र धर्म के सबसे पाखंडी अनुयायी हैं हम।

कड़वा है, मगर सत्य है। 🙏

27/07/2024

हाई एजुकेटेड बेरोजगार युवक एक बात गांठ बांध लें।
6 महीने में आप बाइक के मैकेनिक बन सकते हो।
6 महीने में आप कार के मैकेनिक बन सकते हो।
6 महीने में आप साइकिल के मकैनिक बन सकते हो।
6 महीने में आप मधुमक्खी पालन सीख सकते हो।
6 महीने में आप दर्जी का काम सिख सकते हो।
6 महीने में आप डेयरी फार्मिंग सीख सकते हो।
6 महीने में आप हलवाई का काम सीख सकते हो।
6 महीने में आप घर की इलेक्ट्रिक वायरिंग सीख सकते हो।
6 महीने में आप घर का प्लंबर का कार्य सीख सकते हो।
6 महीने में आप मोबाइल रिपेयरिंग सीख सकते हो।
6 महीने में आप जूते बनाना सीख सकते हो।
6 महीने में आप दरवाजे बनाना सीख सकते हो।
6 महीने में आप वेल्डिंग का काम सीख सकते हो।
6 महीने में आप मिट्टी के बर्तन बनाना सीख सकते हो।
6 महीने में आप घर की चिनाई करना सीख सकते हैं।
6 महीने में आप योगासन सीख सकते हो।
6 महीने में आप मशरूम की खेती का काम सीख सकते हो।
6 महीने में आप बाल काटने सीख सकते हो।
6 महीने में आप बहुत से काम ऐसे सीख सकते हो जो आपके परिवार को भूखा नहीं सोने देगा।
आज भारत में सबसे अधिक दुखी वह लोग हैं जो बहुत अधिक पढ़ लिखकर बेरोजगार हैं।
जो शिक्षा आप को रोजगार न दे सके वह शिक्षा किसी काम की नहीं।
रोजगार के लिए आपका अधिक पढ़ा लिखा होना कोई मायने नहीं।
भारत में 90% रोजगार वे लोग कर रहे हैं जो ज्यादा पढ़े लिखे नहीं हैं।
10% रोजगार पाने के लिए पढ़े लिखे लोगों में मारामारी है।।

स्वंय विचार करें।

#बेरोजगार

26/07/2024

25वें कारगिल विजय दिवस पर मातृभूमि की रक्षा के लिए कारगिल युद्ध में अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारत माता के सच्चे देशभक्त, वीर और साहसी अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि और नमन!🙏

भारत माता की जय!🙏
जय हिंद! वंदे मातरम!🇮🇳
ारगिल_युद्ध

17/07/2024

🔴 जोधपुर BREAKING 🔴

"एक पेड़ मां के नाम" 🙏🏻

पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन को समर्पित, पहल फ़ाउंडेशन चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा, CMIPL के सौजन्य से वीर दुर्गादास स्मारक समिति के संयुक्त तत्वाधान में वृक्षारोपण अभियान का आगाज किया गया।

इस अभियान के तहत, आज मसूरिया पहाड़ी स्थित वीर दुर्गादास स्मारक स्थल पर पौधारोपण कार्यक्रम का शुभारंभ पर्यावरण मित्र, प्रदीप शर्मा द्वारा पूजा अर्चना के साथ किया गया।

इस कार्यक्रम मे "एक पेड़ माँ के नाम" की भावना से स्मारक मे आए हुए सभी पर्यटकों द्वारा एक पेड़ लगवाया गया।

कार्यक्रम में नीम, बड, पीपल, अमलतास, गुलर, शीशम आदि के 51 छायादार पौधे लगाए गए एवं उनके सार सम्भाल की प्रतिज्ञा ली गई।

प्रदीप शर्मा द्वारा पर्यावरण गीतों के माध्यम से सभी लोगों को वृक्षारोपण करने एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम मे पहल फ़ाउंडेशन के अध्यक्ष कमलेश परिहार, सचिव मनोज विधानी, उपाध्यक्ष आशीष मेहता, वीर दुर्गादास स्मारक समिति के सचिव भागीरथ वैष्णव एवं शिवराज, प्रिया, रिया, भोपाल सिंह आदि कार्यकर्ताओं ने इस में कार्यक्रम में अपना श्रमदान

06/07/2024

,, बडी उम्र की कुँवारी लड़कियाँ घर बैठी हैं 👏🏻

अगर अभी भी माँ-बाप नहीं जागे तो स्थितियाँ और विस्फोटक हो सकती हैं।

समाज आज बच्चों के विवाह को लेकर इतना सजग हो गया है कि आपस में रिश्ते ही नहीं हो पा रहे हैं।

समाज में आज 27-28-32 उम्र तक की बहुत सी कुँवारी लडकियाँ घर बैठी हैं क्योंकि इनके सपने हैसियत से भी बहुत ज्यादा हैं ! इस प्रकार के कई उदाहरण हैं।

ऐसे लोगों के कारण समाज की छवि बहुत खराब हो रही है।

सबसे बडा मानव सुख, सुखी वैवाहिक जीवन होता है।

पैसा भी आवश्यक है, लेकिन कुछ हद तक।

पैसे की वजह से अच्छे रिश्ते ठुकराना गलत है। पहली प्राथमिकता सुखी संसार व अच्छा घर-परिवार होना चाहिये।

ज्यादा धन के चक्कर में अच्छे रिश्तों को नजर-अंदाज करना गलत है। "संपति खरीदी जा सकती है लेकिन गुण नहीं।"

मेरा मानना है कि घर-परिवार और लडका अच्छा देखें लेकिन ज्यादा के चक्कर में अच्छे रिश्ते हाथ से नहीं जाने दें।

सुखी वैवाहिक जीवन जियें।

30 की उम्र के बाद विवाह नहीं होता समझौता होता है और मेडिकल स्थिति से भी देखा जाए तो उसमें बहुत सी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।

आज उससे भी बुरी स्थिति कुंडली मिलान के कारण हो गई है।

आप सोचिए जिनके साथ कुंडली मिलती है लेकिन घर और लड़का अच्छा नहीं और जहाँ लड़के में सभी गुण हैं वहां कुण्डली नहीं मिलती और हम सब कुछ अच्छा होने के कारण भी कुण्डली की वजह से रिश्ता छोड़ देते हैं

आप सोच के देखें जिन लोगो के 36 में से 20 या फिर 36/36 गुण भी मिल गए फिर भी उनके जीवन में तकलीफें हो रही हैं, क्योंकि हमने लडके के गुण नहीं देखे |

पढे लिखे आधुनिक समाज को एक सदी और पीछे धकेल दिया !

आजकल समाज में लोग बेटी के रिश्ते के लिए (लड़के में) चौबीस टंच का सोना खरीदने जाते हैं, देखते-देखते चार पांच साल व्यतीत हो जाते हैं |

उच्च "शिक्षा" या "जॉब" के नाम पर भी समय व्यतीत कर देते हैं। लड़के देखने का अंदाज भी समय व्यतीत का अनोखा उदाहरण हो गया है?

खुद का मकान है कि नहीं? अगर है तो फर्नीचर कैसा है? घर में कमरे कितने हैं ? गाडी है कि नहीं? है तो कौनसी है? रहन-सहन, खान-पान कैसा है? कितने भाई-बहन हैं? बंटवारे में माँ-बाप किनके गले पड़े हैं? बहन कितनी हैं, उनकी शादी हुई है कि नहीं? माँ-बाप का स्वभाव कैसा है? घर वाले, नाते-रिश्तेदार आधुनिक ख्यालात के हैं कि नहीं?

बच्चे का कद क्या है?रंग-रूप कैसा है?शिक्षा, कमाई, बैंक बैलेंस कितना है? लड़का-लड़की सोशल मीडिया पर एक्टिव है कि नहीं? उसके कितने दोस्त हैं? सब बातों पर पूछताछ पूरी होने के बाद भी कुछ प्रश्न पूछने में और सोशल मीडिया पर वार्तालाप करने में और समय व्यतीत हो जाता है। हालात को क्या कहें माँ-बाप की नींद ही खुलती है 30 की उम्र पर। फिर चार-पाँच साल की यह दौड़-धूप बच्चों की जवानी को बर्बाद करने के लिए काफी है। इस वजह से अच्छे रिश्ते हाथ से निकल जाते हैं और माँ-बाप अपने ही बच्चों के सपनों को चूर चूर-चूर कर देते हैं।

एक समय था जब खानदान देख कर रिश्ते होते थे। वो लम्बे भी निभते थे | समधी-समधन में मान मनुहार थी। सुख-दु:ख में साथ था। रिश्ते-नाते की अहमियत का अहसास था।

चाहे धन-माया कम थी मगर खुशियाँ घर-आँगन में झलकती थी। कभी कोई ऊँची-नीची बात हो जाती थी तो आपस में बड़े-बुजुर्ग संभाल लेते थे। तलाक शब्द रिश्तों में था ही नहीं | दाम्पत्य जीवन खट्टे-मीठे अनुभव में बीत जाया करता था। दोनों एक-दूसरे के बुढ़ापे की लाठी बनते थे और पोते-पोतियों में संस्कारों के बीज भरते थे। अब कहां हैं वो संस्कार? आँख की शर्म तो इतिहास हो गई। नौबत आ जाती है रिश्तों में समझौता करने की।

लड़का-लड़की अपने समाज के नही होंगे तो भी चलेगा, ऐसी बातें भी सामने आ रही हैं।

आज समाज की लडकियाँ और लड़के खुले आम दूसरी जाति की तरफ जा रहे हैं और दोष दे रहे हैं कि समाज में अच्छे लड़के या लड़कियाँ मेरे लायक नहीं हैं। कारण लडकियाँ आधुनिकता की पराकाष्ठा पार कर गई है। जब ये लड़के-लड़कियाँ मन से मैरिज करते हैं तब ये कुंडली मिलान का क्या होता है ? तब तो कुंडली की कोई बात नहीं होती‌ | यही माँ बाप सब कुछ मान लेते हैं। तब कोई कुण्डली, स्टेटस, पैसा, इनकम बीच में कुछ भी नहीं आता।

अगर अभी भी माँ-बाप नहीं जागेंगे तो स्थितियाँ और विस्फोटक हो जाएंगी। समाज के लोगों को समझना होगा कि लड़कियों की शादी 22-23-24 में हो जाये और लड़का 25-26 का हो। सब में सब गुण नहीं मिलते।"

घर, गाड़ी, बंगला से पहले व्यवहार तोलो। माँ बाप भी आर्थिक चकाचोंध में बह रहे है । पैसे की भागम-भाग में मीलों पीछे छूट गए हैं, रिश्ते-नातेदार।

टूट रहे हैं घर परिवार | सूख रहा है प्रेम और प्यार।

परिवारों का इस पीढ़ी ने ऐसा तमाशा किया है कि आने वाली पीढ़ियां सिर्फ किताबों में पढ़ेंगी "संस्कार"।

समाज को अब जागना जरूरी है अन्यथा रिश्ते ढूंढते रह जाएंगे।"

#शादी #विवाह #तलाक #पुरुष_की_सर्वश्रेष्ठ_सोच_भरी_मर्मस्पर्शी_कहानी

03/07/2024

ऑस्ट्रेलिया में बढ़ई, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन, पेंटर, वेल्डर, मोटर मैकेनिक, शीटमेटल वर्कर, फिटर, मेटल फैब्रिकेटर, एसी मैकेनिक, ऑटोमोटिव इलेक्ट्रीशियन, कुक, हेयरड्रेसर, और पेस्ट्रीकुक की बहुत जरूरत है। अप्लाई करने के लिए कॉल करें: 0172-5219200

01/07/2024

ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद आज एक जुलाई से नए सत्र के प्रारंभ होने पर विद्यार्थियों और शिक्षकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। यह समय दोबारा से अपना ध्यान और अपनी ऊर्जा अपने लक्ष्यों पर केंद्रित करने का है।

आइए, हम सशक्त उत्तराखंड और समृद्ध भारत की नींव बनकर "विकसित भारत" के संकल्प को सिद्धि में बदलें।

04/06/2024

#बरगद एक लगाइये, #पीपल रोपें पाँच।
घर घर नीम लगाइये,यही पुरातन साँच।।

यही पुरातन साँच,- आज सब मान रहे हैं।
भाग जाय प्रदूषण सभी अब जान रहे हैं ।

विश्वताप मिट जाये होय हर जन मन गदगद।
धरती पर त्रिदेव हैं- नीम पीपल और बरगद।।

*आप को लगेगा अजीब बकवास है , किन्तु यह सत्य है.. .*

*पिछले 68 सालों में पीपल, बरगद और नीम के पेडों को सरकारी स्तर पर लगाना बन्द किया गया है*

*पीपल कार्बन डाई ऑक्साइड का 100% एबजॉर्बर है, बरगद 80% और नीम 75 %*

*इसके बदले लोगो ने विदेशी यूकेलिप्टस को लगाना शुरू कर दिया , जो जमीन को जल विहीन कर देता है*

*आज हर जगह यूकेलिप्टस, गुलमोहर और अन्य सजावटी पेड़ो ने ले ली है*

*अब जब वायुमण्डल में रिफ्रेशर ही नही रहेगा तो गर्मी तो बढ़ेगी ही*
*और जब गर्मी बढ़ेगी तो जल भाप बनकर उड़ेगा ही*

*हर 500 मीटर की दूरी पर एक पीपल का पेड़ लगायें*
*तो आने वाले कुछ साल भर बाद प्रदूषण मुक्त हिन्दुस्तान होगा*

*वैसे आपको एक और जानकारी दे दी जाए*

पीपल के पत्ते का फलक अधिक और डंठल पतला होता है
जिसकी वजह शांत मौसम में भी पत्ते हिलते रहते हैं और स्वच्छ ऑक्सीजन देते रहते हैं।

वैसे भी पीपल को वृक्षों का राजा कहते है।
इसकी वंदना में एक श्लोक देखिए-
*मूलम् ब्रह्मा, त्वचा विष्णु,*
*सखा शंकरमेवच।*
*पत्रे-पत्रेका सर्वदेवानाम,*
*वृक्षराज नमस्तुते।*
*अब करने योग्य कार्य*

*इन जीवनदायी पेड़ों को ज्यादा से ज्यादा लगाने के लिए समाज में जागरूकता बढ़ायें

25/05/2024

ससुराल में साली का
बाग़ में माली का
होंठो में लाली का
पुलिस में गाली का
मकान में नाली का
कान में बाली का
पूजा में थाली का
खुशी में ताली का ------ बड़ा महत्व है।

फलों में आम का
भगवान में राम का
मयखाने में जाम का
फैक्ट्री में काम का
सुर्ख़ियों में नाम का
बाज़ार में दाम का
मोहब्ब्त में शाम का ------- बड़ा महत्व है।

व्यापार में घाटा का
लड़ाई में चांटा का
रईसों में टाटा का
जूतों में बाटा का
रसोई में आटा का ----- बड़ा महत्व है।

फ़िल्म में गाने का
झगड़े में थाने का
प्यार में पाने का
अंधों में काने का
परिंदों में दाने का ----- बड़ा महत्व है।

ज़िंदगी में मोहब्ब्त का
परिवार में इज्ज़त का
तरक्की में किसमत का
दीवानो में हसरत का ------ बड़ा महत्व है।

पंछियों में बसेरे का
दुनिया में सवेरे का
डगर में उजेरे का
शादी में फेरे का ------ बड़ा महत्व है।

खेलों में क्रिकेट का
विमानों में जेट का
शरीर में पेट का
दूरसंचार में नेट का ----- बड़ा महत्व है।

मौजों में किनारों का
गुर्वतों में सहारों का
दुनिया में नज़ारों का
प्यार में इशारों का ------ बड़ा महत्व है।

खेत में फसल का
तालाब में कमल का
उधार में असल का
परीक्षा में नकल का। ----- बड़ा महत्व है।

ससुराल में जमाई का
परदेश में कमाई का
जाड़े में रजाई का
दूध में मलाई का ----- बड़ा महत्व है।

बंदूक में गोली का
पूजा में रोली का
समाज में बोली का
त्योहारों में होली का
श्रृंगार में रोली का ----- बड़ा महत्व है।

बारात में दूल्हे का
रसोई में चूल्हे का ------- बड़ा महत्व है।

सब्जियों में आलू का
बिहार में लालू का
मशाले में बालू का
जंगल में भालू का
बोलने में तालू का ------- बड़ा महत्व है।

मौसम में सावन का
घर में आँगन का
दुआ में दामन का
लंका में रावन का ------- बड़ा महत्व है।

चमन में बहार का
डोली में कहार का
खाने में अचार का
मकान में दीवार का ----- बड़ा महत्व है

सलाद में मूली का
फूलों में जूली का
सज़ा में सूली का
स्टेशन में कूली का ------ बड़ा महत्व है।

पकवानों में पूरी का
रिश्तों में दूरी का
आँखों में भूरी का
रसोई में छूरी का ---- बड़ा महत्व है।

माँ की गोदी का
देश में मोदी का ----- बड़ा महत्व है।

खेत में साप का
सिलाई में नाप का
खानदान में बाप का ----- बड़ा महत्व हे।

🙏🙏🌹 राम राम जी 🌹🙏🙏

✍️...........

19/05/2024

गांव हो या शहर हो बारिश के सीजन में हर जगह हरी सब्जी का अभाव हो जाता है जो सब्जियां शहरों में उपलब्ध रहती है उनकी कीमत आसमान छूती है इसलिए लोग हरी सब्जी का विकल्प खोजते हैं।
किसी दिन कढ़ी बन गई तो किसी दिन छोले बन गए।
मेरी नानी जब थी तब वो सर्दियों के सीजन में खेतों में जब फूल गोभी खूब सारी तैयार हो जाती थी तब उसको टुकड़ों में कटवा कर धूप में एकदम सुखा कर रखवा देती थी।
बारिश में जब सब्जियों की आमद कम हो जाती थी तब कुछ सूखी फूलगोभी के टुकड़े पहले पानी में भिगो दिए जाते थे और नर्म होने के बाद आलू मिलाकर उनकी सब्जी बना ली जाती थी।
कही कहीं पर पालक, मेथी, बथुआ, सरसों जैसे साग में बेसन का घोल लगा कर सुखा कर रख लिया जाता है और बाद में उनकी सब्जी या साग बनाया जाता है।
मेरी एक पड़ोसन बिहार की थी उनके घर से आलू के मोटे मोटे टुकड़े काटकर धूप में सुखा कर आया जिनकी वो बड़ी मजेदार सब्जी बनाती थी।
हमारे बुजुर्ग बड़े दूर दर्शी थे वो जब सब्जी की अधिकता होती थी तब उन्हे संरक्षित करके जब सब्जियों की कमी होती थी तब के लिए रख लेते थे।
ऐसे ही समय के लिए अदौरी, गोभौरी,कोहड़ौरी, मेथौरी बनाकर रखी जाती थी। जिसे चाहे आप बारिश के सीजन में उपयोग करे या जब खाने का मन करे तब बनाए खाए।

कोहड़ौरी हमारी तरफ उड़द की दाल और सफेद कद्दू(भातुआ) से बनाई जाती है।

गांवों में तो होली के बाद घर घर बनती है और साल भर यही खाई जाती है। पंजाब में अमृतसरी बाडिया प्रसिद्ध हैं।
हमने तो बचपन से गांव की घर की बनी खाई है इसलिए हमे तो वही भाती है बाजार वाली विकल्प हो सकती है लेकिन वो स्वाद नही होता है।

गांव के जैसी कोहड़ौरीबनाने के लिए
उड़द दाल- ढाई सौ ग्राम
सफेद कद्दू- आधा किलो
हींग- 1 चुटकी
अदरक- 1 इंच
जीरा- ½ चम्मच
लौंग- तीन चार
काली मिर्च- कुछ दाने
दालचीनी- 1 टुकड़ा
साबुत धनिया- एक बड़ा चम्मच
साबुत लाल मिर्च तीन चार
नमक- स्वादानुसार

विधि ---
दाल को अच्छी तरह से धोकर कुछ घंटे के लिए भिगो दीजिए फिर उसको पीसकर मोटा सा पेस्ट बना लिजिए। हमारी तरफ़ इस पेस्ट को पीठी कहते हैं। इस पीठी में सभी मसाले मोटा दरदरा सा पीसकर मिला दीजिए।

कद्दू के अंदर से बीज निकालकर उसे छिलकर बारीक टुकड़ों में काट लिजिए इसे धोकर धूप में सूखने डाल दीजिए ताकि उसका पानी मर जाए।

अब दाल की पीठी में कद्दू के सूखे टुकड़े डालकर खूब फेटिए ताकि उसके अंदर खूब हवा भर जाए और बड़ियां अच्छी बने।
अब आपकी बड़ियों का मिश्रण तैयार है।

छत पर एक सूती साफ कपड़ा बिछाए और छोटी छोटी बड़ियां बना ले। इन्हे तेज धूप में तीन चार दिन अच्छी तरह से सुखाए ताकि इनमें जरा सी भी नमी न रहे और फिर इन्हे डिब्बे में भरकर रख लें जब दिल करे तब इनकी स्वादिष्ट सब्जी बनाइए।

15/05/2024

#बरगद एक लगाइये, पीपल रोपें पाँच।
घर घर नीम लगाइये,यही पुरातन साँच।।

यही पुरातन साँच,- आज सब मान रहे हैं।
भाग जाय प्रदूषण सभी अब जान रहे हैं ।

विश्वताप मिट जाये होय हर जन मन गदगद।
धरती पर त्रिदेव हैं- नीम पीपल और बरगद।।

आप को लगेगा अजीब बकवास है , किन्तु यह सत्य है.. .

पिछले 68 सालों में पीपल, बरगद और नीम के पेडों को सरकारी स्तर पर लगाना बन्द किया गया है,

पीपल कार्बन डाई ऑक्साइड का 100% एबजॉर्बर है, बरगद 80% और नीम 75 %

इसके बदले लोगो ने विदेशी यूकेलिप्टस को लगाना शुरू कर दिया , जो जमीन को जल विहीन कर देता है,

आज हर जगह यूकेलिप्टस, गुलमोहर और अन्य सजावटी पेड़ो ने ले ली है,

अब जब वायुमण्डल में रिफ्रेशर ही नही रहेगा तो गर्मी तो बढ़ेगी ही,
और जब गर्मी बढ़ेगी तो जल भाप बनकर उड़ेगा ही,

हर 250 मीटर की दूरी पर एक पीपल का पेड़ लगायें,
तो आने वाले कुछ साल भर बाद प्रदूषण मुक्त हिन्दुस्तान होगा...

वैसे आपको एक और जानकारी दे दी जाए...

पीपल के पत्ते का फलक अधिक और डंठल पतला होता है
जिसकी वजह शांत मौसम में भी पत्ते हिलते रहते हैं और स्वच्छ ऑक्सीजन देते रहते हैं।

वैसे भी पीपल को वृक्षों का राजा कहते है।
इसकी वंदना में एक श्लोक देखिए-

मूलम् ब्रह्मा, त्वचा विष्णु, सखा शंकरमेवच।
पत्रे-पत्रेका सर्वदेवानाम, वृक्षराज नमस्तुते।

अब करने योग्य कार्य....

इन जीवनदायी पेड़ों को ज्यादा से ज्यादा लगाने के लिए समाज में जागरूकता बढ़ायें....

Address

Sardarpura 8 C Road
Jodhpur
342001

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Balaji Boys Hostel Sardarpura 8 C Road 9460981447 posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Balaji Boys Hostel Sardarpura 8 C Road 9460981447:

Share

Category