06/05/2018
👏🏻 श्री हनुवंत हॉस्टल बचाओ अभियान 👏🏻
*इसको पूरा जरूर पढ़े भाईयों..*
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श्री हनुवंत राजपूत हॉस्टल के सभी पूर्व छात्र कल यानि 6 मई 2018 , सुबह 8 बजे हनुवंत हॉस्टल जरूर - जरूर पधारे ।
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_कड़वी मगर है .. हकीक़त .._
श्री हनुवंत राजपूत हॉस्टल ग्रुप में विराजमान सीनियर भाइयों को प्रणाम और मेरे सहपाठी साथियों को जय माता जी री हुकुम ।
आज जो ये विषय छिड़ा है इसे सुन कर या देख कर बहुत दुःख हो रहा है क्योंकि हम पिछले कही वर्षों से जिस एथलेटिक्स ग्राउण्ड को बनाने की मांग कर रहे थे , उस सोच की आज अंतिम क्रिया होते नजर आ रही है ..
वाह ! मेरे समाज के बन्धुओ ..
इतनी गरीबी आ गई क्या हमारे समाज में ..?
जो चंद पैसों के लिए आज शिक्षा की इस धरोहर को शादीयों का स्थल बनाने की सोचने लग गए ।
*ये निर्माण कार्य कराने से पहले कम से कम उस शिलालेख को तो ढंग से पढ़ लेते .. जो हमारे बुजुर्गो को शिक्षा प्राप्त कराने के उद्देश्य से उस बोर्डिंग हॉस्टल की पोल पर लगा हुआ है ।*
अब हॉस्टल के चारों ओर देखो क्या नजर आएगा .. आप खुद ही देख लो .. फिर हमें बता दो ।
एक साइड हनुवंत गार्डन , दूसरी तरफ मीरा गार्डन , तीसरी तरफ जैसलमेर रेल मार्ग .. और चौथी तरफ रेल मार्ग थोड़ा दूर था तो आपने अब उस साइड गार्डन बनाने का मन कर दिया वाह क्या दिमाग है आपका .. आपको सेल्यूट करता हूँ मैं इस सोच ले किये .. ।
अब आप ऐसे काम करने लग ही गए हो तो मुझे नही लगता अब हनुवंत हॉस्टल में कुछ शिक्षा के क्षेत्र में कुछ बचेगा .. हाल ही में जिस तरह चौपासनी स्कूल का हाल हुआ है जो हम देख रहे है मयूर स्कूल आने के बाद ... उसी तरह अब हनुवंत राजपूत हॉस्टल का हाल होगा चंद सालों में इन गार्डनों के कारण ।
आप इन राजपूत साधारण परिवार से आने वाले बच्चों को पढ़ने मत देना अब ..
_श्रीमान् गोपाल सिंह जी रुदिया मैं आपसे पूछना चाहता हूँ आप क्या बनाना चाहते है इस हॉस्टल को .. शिक्षा का केंद्र या शादी का केंद्र ..???_
बच्चों के उत्तम शिक्षण के लिए क्या क्या सुविधा होनी चाहिए .. इस बात पर आपने कभी सही ढंग से गौर किया क्या .. ??
आज के समय में आप किसी भी स्कूल में या किसी बड़े हॉस्टल में जाओगे तो वहां आपको सबसे पहले एक ग्रीन मैदान.. और उसमें खेलते हुए वो होनहार बच्चे नजर आएंगे .. जो शिक्षा के साथ साथ अपना सर्वांगिण विकास करते हो ।
लेकिन यहाँ आपने कुछ परिस्थितियाँ अलग ही बना रखी है ।
जिस एथलेटिक्स ग्राउण्ड की मांग हम कर रहे थे .. उससे क्या क्या फायदे होते है वो शायद एक स्पोर्ट्समैन ही समझ सकता है .. इसमें उसके खेल में सुधार तो होता ही है साथ ही साथ .. उस लड़के के सरकारी नौकरी में लगने के भी चांस ज्यादा बनते है क्योंकि वो उस ग्राउंड में रोजाना दौड़ - भाग करके सेना भर्ती की तैयारी कर सकता था .. लेकिन उसको यहाँ ये पूर्ण सुविधा नही मिलने के कारण उसको 3-4 किलोमीटर दूर जाकर फिर वहां तैयारी करनी पड़ती है ।
क्यो ना ये ग्राउंड आज से कई साल पहले बन गया होता तो किसी को यहाँ दौड़ते हुए देख कर कोई और लड़के का भी मन करता और वो भी कही सेलेक्ट होने में कामयाब होता और प्रतिभाओं की संख्या 400 से बढ़कर 500 भी हो सकती थी .. लेकिन अब करे क्या .. ये हमें अब सोचना पड़ेगा .. अभी भी आपके पास समय है ग्राउण्ड बना दो ... और अगर नही बना सकते तो कम से कम ये गार्डन तो मत बनाओ ।
आपने कभी वापस युवराज शिवराज सिंह बिल्डिंग के अदंर जाकर भी कभी उसको सही ढंग से देखा क्या ..??
वो ऐसे लग रही है जैसे 1857 की क्रांति के समय बना महल हो जो झर झर स्थिति में आ गया हो .. पूरी बिल्डिंग में ऊपर की टंकियों से पानी टपकता रहता है जिससे पूरी बिल्डिंग में सीमेन्ट उतरने लग गया है .. इसको देख कर कोई नही कहेगा की ये पिछले 3-4 सालो में बनी है ।
और क्या - क्या बताऊं आपको सब जगह मुझे गड़बड़ ही गड़बड़ नजर आ रहा है ।
आपने 3-4 बार तो नए कई बाथरूम बना दिए लेकिन सब के सब फ़ैल .. आपको ढंग के कारीगर नही सकते क्या ??
लेकिन आपने उन बाथरूमो को रिपेयर ना करा के उनको तुड़वा दिए और दूसरी जगह और नए बाथरूम बना दिए कम से कम उन पुराने वालों को वापस रिपेयर कराने के बारे में तो सोचते ..
ये पैसा समाज का है आपका नही है समझे .. यूँ फिजुलखर्चे में मत उड़ाओ साहब ..
आपने जो ये फिजुलखर्चा किया है बिना मतलब का.. इस राशि से शायद किसी साधारण परिवार में पैदा हुए एक लड़के की पूरी पढाई हो सकती थी ।
मेरे को सत्य बात कहने में किसी का डर नही लगता ..
मैं मेरी आँखों के सामने ये गलत निर्णय होता नही देख सकता ।
अपने अच्छे सम्बन्ध अपनी जगह है लेकिन जब समाज या हॉस्टल की बात आएगी वहाँ मैं या कोई भी पूर्व छात्र हो , वो गलत बात का समर्थन नही करेगा ।
और मुझे तो ऐसे लोगों पर गुस्सा आता है जो अपने इस छात्रावास में अपनी सेवा देते है और वेतन भी उठाते है और अपने ही इन नन्हे - मुन्हे छात्रों को मोटिवेट के बदले .. डीमोटीवेट करते है .. जो सिर्फ नवज्योति अखबार पढ़ने आते है .. मैं उनसे भी पूछना चाहता हूँ की आपने कभी किसी छात्र की परेशानी को समझा क्या ??
मैं खुद उस दिन का गवाह हूँ .. जब मैं ऑफिस में जसवंत सिंह जी दाता ( सीनियर वार्डन ) के पास खड़ा था और एक न्यू एडमिशन लेने साधारण परिवार से लड़का आया और बोला मेरे को हॉस्टल में एडमिशन चाहिए .. तो दाता ने बोला की नही मिल सकता .. तो उसने बोला मैं RAS की तैयारी करूँगा .. तो वापस इन जसवंत सिंह जी दाता का वो जवाब आया तो मेरी आँखे फटी सी फटी रह गई और वो बोले की तू कभी RAS pre. भी पास नही कर सकता .. तू तो ऐसा कर B.A. करले और गाँव चला जा वापस ... मगर मैं आपको बताऊं वो वही लड़का आज RAS Pre. Exam पास भी किया और वो अभी किसी अन्य सरकारी सेवा में लग भी चूका है ।
इससे बड़ा आपको क्या उदाहरण दूँ ।
ऐसे लोगों को इस छात्रावास में जगह ही नही देनी चाहिए जो छात्रों का हौसला बढ़ाने के बदले उसको अपनी ही नजरों में गिरा देते है ।
आज का दौर पहले जैसा नही रहा पहले तो सब नौकरियों में अपने समाज के ही ऑफिसर मिलते थे तो थोड़ी बहुत सिफारिश भी चल जाती थी .. पर आज वो स्थितियां रही नही साहब ।
समाज को ऊपर उठा नही सकते तो कम से कम नीचा तो मत गिराओ ।
निवेदक -
*हिरेन्द्र सिंह डाँवरा*
_पूर्व छात्र - श्री हनुवंत राजपूत छात्रावास , जोधपुर_
👏🏻 श्री हनुवंत हॉस्टल बचाओ अभियान 👏🏻