14/11/2021
"करौली स्थापना दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं ।
करौली नगर की स्थापना आज के ही दिन कार्तिक शुक्ल एकादशी संवत 1405, तदानुसार ईस्वी सन 1348 में राजा अर्जुन देव जी ने कल्याण राय जी के मंदिर की नींव भद्रावती नदी के किनारे स्थित एक ऊंचे टीले पर की थी, साथ ही अंजनी माता मंदिर की नींव वहां से लगभग तीन किमी दूर बिरवास पहाड़ी पर लगा कर की थी। करौली नगर का नाम इष्टदेव कल्याण राय जी के नाम पर ही कल्याण पुरी था जिसे मुस्लिम शासक फारसी में सुविधा के लिए केवल करौली ही काम में लेते थे, वही नाम अपभ्रंश के रूप में अंत में करौली ही प्रचलन में आने लगा। करौली नगर की स्थापना ईस्वी सन् 1348 में ही हो गई थी और यह आबाद भी हो गया था, लेकिन तब का पुराना नगर आज के फूटा कोट तक ही था, वर्तमान स्वरूप इसे अट्ठारहवीं शती में महाराजा गोपाल सिंह जी ने दिया जिन्होंने वर्तमान विशाल परकोटा बनवा कर नगर को सुरक्षित किया। राजा धर्मपाल द्वितीय प्रथम राजा थे जिनका राज्याभिषेक करौली के राजमहल में हुआ।
राजा गोपाल दास जी के पूर्व के शासकों का राजतिलक उंटगिर के किले में और राजा गोपाल दास जी के बाद तथा धर्मपाल के पूर्व तक के शासकों का राजतिलक बहादुरपुर जिसे बैकुंठपुर कहा जाता था, में होता था।
करौली की स्थापना के 673 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 674 वें स्थापना दिवस के अवसर पर राजा अर्जुनदेव के वंशज वर्तमान करौली राजपरिवार तथा INTACH करौली चैप्टर की ओर से कल्याण राय जी के मंदिर में विशेष पूजा आरती का कार्यक्रम आज रविवार को दिन के 12 बजे करवाया जायेगा। मेरा सभी नगर वासियों से अनुरोध है कि इस उपलक्ष्य में आज के दिन अपने अपने घरों पर 5 दीपक अवश्य अपने शहर के नाम पर प्रज्वलित कर नगर को सामूहिक रूप से शोभायमान करने में अपना योगदान दें।