29/03/2021
https://youtu.be/Do6Fv0YiRpM
यह कविता मेरे पिताजी स्व॰ श्री जगदीश चंद्र पाटनी 'अबोध' की काव्य संग्रह- *'गर्जन'* की रचनाओं में से एक है जिसका शीर्षक है - *देव मनुज तो बनना होगा!!*
यह रचना कवि की इच्छाओं को शब्दों की माला में पिरो कर एक भावनात्मक रूप देकर श्रोताओं तक पहुंचाने का एक प्रयास करती है। हमारे देश की महानता, कार्य कुशलता, दक्षता को दर्शाते हुए कवि श्रोताओं तक यह संदेश पहुंचाना चाहते हैं कि देश की महानता उस देश की सत्ता, कानून या संसद के सत्र से नहीं, बल्कि सच्चे, इमानदार और सुचरित्र देशवासियों से होता है। कवि कहते हैं कि आज हमें उन वेद, पुराण, उपनिषद के ज्ञान को पूरे विश्व के सम्मुख रखना है, हमारे देश भारत को एक धर्म रूपी रत्नाकर के रूप में पहचाना जाना चाहिए। इन विसम परिस्थितयों में भी धैर्य न खोते हुए जिस प्रकार मेरा भारत देश निखर कर पूरे विश्व मे अपना लोहा मनवा रहा है, हमें जरूरत है उन परंपराओं को, उस विज्ञान को, कला को, जीवनशैली को सहेज कर रखने की जिससे हम शांति का पाठ पूरे विश्व को पढ़ा सकें!
इस ओर,
*एक कदम हर मनुष्य को बढ़ाना होगा,*
*यह यक्ष प्रश्न तो मिटना होगा,*
*देव मनुज तो बनना होगा!!*
*देव मनुज तो बनना होगा!!*
आशा है कि आपको यह कविता पसंद आएगी, मैं त्रुटियों के लिए क्षमाप्रार्थी हूं व किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का मेरा उद्देश्य नहीं है।
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Garjan Kavya Sangrah- Abodh
This series is a tribute to my father Late Mr. Jagdish Chandra Patni for his marvelous work in Hindi literature.
Garjan Kavya Sangrah in itself is a book of Lessons learnt in life by the Poet.
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यह कविता मेरे पिताजी स्व॰ श्री जगदीश चंद्र पाटनी 'अबोध' की काव्य संग्रह- 'गर्जन' की रचनाओं में से एक है जिसका शीर्षक ह...