22/07/2024
आज फिर
अपने जीवन की
किताब खोली
तो देखा कि
हर पन्ना ही
प्रभु परमात्मा की
रहमतों से भरा हुआ था ।।
*हे दीनबन्धु दीनानाथ*
*हे कृपासिंधु कृपानिधान*
*हे दाता दीनदयाल*
*तेरी मेहरबानियों का सिलसिला*
*बस यूँ ही चलता रहे.....