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Thachi Valley Blogger कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन ।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि ॥

कर्म में ही तुम्हारा अधिकार है, कभी कर्मफल में नहीं, क्योंकि वह तुम्हारे अधिकार से बाहर है; तुम कर्मफल की आशा से कर्म में प्रवृत्त मत होओ, फिर कर्मत्याग में भी तुम्हारी प्रवृत्ति न हो अर्थात् अपना कर्तव्य-कर्म करते चलो।

शिव और विष्णु ने अपनी एकरूपता दर्शाने के लिए ही 'हरिहर' रूप धरा था, जिसमें शरीर का एक हिस्सा विष्णु यानी हरि और दूसरा हि...
28/07/2026

शिव और विष्णु ने अपनी एकरूपता दर्शाने के लिए ही '
हरिहर' रूप धरा था, जिसमें शरीर का एक हिस्सा विष्णु यानी हरि और दूसरा हिस्सा शिव यानी हर का है।

24/07/2026

शेषनाग (या आदिशेष) एक दिव्य नाग हैं, जिनके हज़ार फन (सिर) होते हैं और वे सृष्टि के आरंभ से ही भगवान विष्णु के शय्या (बिछ...
23/07/2026

शेषनाग (या आदिशेष) एक दिव्य नाग हैं, जिनके हज़ार फन (सिर) होते हैं और वे सृष्टि के आरंभ से ही भगवान विष्णु के शय्या (बिछौना) के रूप में रहते हैं। इनका नाम "शेष" इसलिए पड़ा क्योंकि ब्रह्मांड की रचना के बाद जो भी बचा (शेष) वही शेषनाग बने। शेषनाग नागराज वासुकी, तक्षक, और अन्य नागों के अग्रज हैं

श्रृंगी ऋषि (ऋष्यश्रृंग) रामायण कालीन एक महान तपस्वी ऋषि थे, जो विभाण्डक ऋषि के पुत्र थे। उनका जन्म हिरण के सींग के साथ ...
24/04/2026

श्रृंगी ऋषि (ऋष्यश्रृंग) रामायण कालीन एक महान तपस्वी ऋषि थे, जो विभाण्डक ऋषि के पुत्र थे। उनका जन्म हिरण के सींग के साथ हुआ था। उन्होंने राजा दशरथ की पुत्री शांता से विवाह किया और दशरथ के लिए पुत्रकामेष्टि यज्ञ कराया, जिससे भगवान राम और उनके भाइयों का जन्म हुआ। सिहावा (छत्तीसगढ़) में उनका प्रसिद्ध आश्रम है।

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