16/04/2014
जिसमे सभी लोग और ओशो प्रेमी अपने परिवार के साथ आकर कुदरत के नज़ारो को नजदीक से देख कर आनंदित हो पाएंगे .........
जहां आप पशु-पक्षियों को नजदीक से छू कर देख सकेंगे, उनकी मीठी बोली से आनंदित हो पाएंगे। अपनी गोशाला से उत्पन्न शुद्ध दूध को पी सकेंगे और बिना कीटनाशक और यूरिया के तैयार हुए साग-सब्जी, फल और भोजन का स्वाद ले सकेंगे ..........
अज्ञातवास के साथ ही " न्यूगल नदी" बहती है,.... जिसका पानी बहुत ही सुन्दर और साफ़ है,…... उसकी तेज़ धारा पत्थरो से टकरा कर जो शोरगुल मचती है उसका दृश्य तो देखते ही बनता है ,.... लीची और आम के बाग़ के अलावा और कई तरह के फलो के पेड़ लगे है तथा लगाये जा रहे है ....... रंगीन फूलो कि क्यारी पर बैठे पक्षी और तितलियों के झुण्ड ,… रात में जुगनुओं कि जगमगाहट देख कर ऐसा लगता है जैसे मनो आकाश के तारे ज़मीन पर उतर आये हो ,...
इस कुदरत के नज़ारो को देखने का सुन्दर, शान्त, ऊर्जावान तथा मनमोहक स्थान है,… अज्ञातवास,…… जहां आकर आदमी दुनियादारी की भागमभाग से दूर रहकर किसी को भी अपना पता नहीं बताना चाहता ताकि उसे बेमतलब परेशान करने वाले और उसकी बेमतलब की परेशानिया उसका पीछा करते हुए यहाँ तक भी न आ जाये ,…. इसलिए वह अज्ञात ही रहना चाहता है.......
इसी अज्ञातवास आश्रम रिसोर्ट के बनते हुए समय के कुछ चित्र इस एल्बम में उपलब्ध है ,,,,,,,,