13/02/2016
【कुछ नौकरियां तनख्वाह के लिए नही होती ..】
पोस्ट थोड़ी लम्बी हैं पर पढियेगा जरूर , और अगर दिल में ठक की कोई आवाज़ आये तो खुदको कमेंट करने और शेयर करने से रोकियेगा मत..
ये दिल्ली में जो क्यूट-क्रांतिकारी भारत माता की बर्बादी और अपने मौसा अफज़ल गुरु के नारे लगा रहे हैं , बेटे आप ये मत भूलना कि आपके जैसे कुवें के मेंढक बहुत आये और बहुत चले गए ।
अगर खून में ये बोलने का उबाल है कि “लड़ाई जारी रहेगी भारत की बर्बादी तक” ..
तो चलो तुम्हारे उबाल का लिटमस टेस्ट भी कर लें । ये बात दिल्ली की सर्दी में बोलना आसान है, क्या हैं कि यहाँ की रोमैंटिक सर्दी पर तो गाने भी बन गए, अमृता अरोरा भी कमर हिलाकर बोलती है “प्यार तेरा दिल्ली की सर्दी ”
कुछ मील ऊपर बढ़ो और और सियाचिन के उभार जहां से शुरू होता है न बस वहीँ खड़े हो जाओ वहां पर पैर अपने आप नहीं चलते उन्हें घसीटना पड़ता है हाथों से ।
वहां घुटने तक की बर्फ में हनुमथप्पा जैसे शेर गश्त लगाते हुए जब मिलेंगे और वूफ़र-बेस वाली आवाज़ में भारत माता की जय सुनोगे न तो शायद आपके खून में कुछ शर्मिंदगी की RBC बढ़ जाए और समझ में आए कि कुछ नौकरियां तनख्वा के लिए नहीं होती । कुछ लोग होते ही इल्लोजिकल हैं ।
आपके कोकाकोला में फ़िज़ कम होता है और आप सबवे वाले को ह्युमन राइट्स की परिभाषा समझाने लगते हैं । उस सनकी फौजी का एक ही मग होता है, पीने का, धोने का, नहाने का..
बेबी!
ये वो नौकरियां है जिनमे एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया में एक ही ही कॉलम होता है “पागलपन”...
हाँ वही इन्सेनिटी!
अगर किताबी कांगड़ी से जलाए हुए अंगारे जिगर में कम हो जाएँ और -64c पर सांस आना बंद हो जाए तो उनमें से किसी हनुमथप्पा को आवाज लगा देना वो तुमको और तुम्हारे जैसे दो और को कंधे पर लादकर अपने 60 किलो के बैग के साथ तुम्हे पैदल ही JNU तक छोड़ आएगा।
पर सुनो...
पीछे मुड़कर बाय मत करना, कहीं गलती से भारत माता की बर्बादी वाले नारे सुन लिए और अन्दर का फौजी बिगड़ गया तो पूरे विश्वविद्यालय में आपकी क्यूट सी गूँज आएगी..
“ओह फ़क! दिस गाय इस इन्सेन! वोयलेंस इस नॉट अ सोल्यूशन!”
आप जैसे किताबी क्रन्तिकारी भतेरे आ कर गए, भारत संभालना है तो दिल्ली से निकलो और सीमा पर जाकर देखो कि बर्फ की सफ़ेद चादर ओढ़े एक पागल हनुमंथप्पा दिन रात अपने बदन की गर्मी से पहाड़ियां को पिघला रहा है और वादियों की आँखों में आँखें डाले, पंजा लड़ाकर, मुस्कुराते हुए गा रहा है कि ..
“यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रोमां मिट गए जहां से
अब तक मगर है बाकी नाम-ओ-निशाँ हमारा,
कि कुछ तो बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माना हमारा !