22/01/2026
हम दूसरों की तरह सफल जीवन तो जीना चाहते हैं, लेकिन उनकी तरह परिश्रम नहीं करना चाहते हैं। दूसरों की सफलता हमें आकर्षित करती है, लेकिन उस सफलता के मूल में जो परिश्रम और पुरुषार्थ उसके द्वारा किया जाता है, हम उससे अनभिज्ञ बने रहना चाहते हैं, हम उससे बचे भी रहना चाहते हैं। हमारी वाह्य दृष्टि दूसरों के बाहरी विलास को तो देख पाती है, लेकिन उसके प्रयास को नहीं देख पाती है।
दूसरों के जैसे बनने के लिए उनके जैसा प्रयास भी हमें करना पड़ेगा ये बात हम भूल जाते हैं। किसी की सफलता को नहीं अपितु उसके द्वारा किये गये परिश्रम और पुरुषार्थ को देखने की दृष्टि उत्पन्न करो। जिस दिन हम दूसरों के सफल जीवन को देखने के बजाय उसके मूल में छुपे परिश्रम पर अपना ध्यान केंद्रित कर लेंगे निश्चित ही उस दिन हमारा जीवन भी सफलता के पथ का पथिक बन जायेगा।🖋️
जय श्री कृष्ण
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