11/08/2026
السَّلَامُ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَةُ اللّٰهِ وَبَرَكَاتُهُ
إِنَّا لِلَّهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन
एक मासूम फूल मुरझा गया… एक मासूम मुस्कान याद बन गई।
आज MEED PUBLIC SCHOOL परिवार अत्यंत दुःख और शोक में है।
हमारी प्यारी छात्रा Fariha Parween (फ़रीहा परवीन), कक्षा Nursery, मात्र पाँच वर्ष की छोटी-सी उम्र में इस दुनिया से रुख़्सत होकर अपने रब के पास चली गई।
एक मासूम बच्ची, जिसकी मुस्कान, मासूमियत और प्यारी बातें विद्यालय परिवार के दिलों में अपनी जगह बना चुकी थीं, आज हमारे बीच नहीं हैं। यह वियोग हम सभी के लिए अत्यंत दुःखद और हृदयविदारक है।
إِنَّا لِلَّهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ
हम सब अल्लाह के हैं और उसी की ओर लौटकर जाने वाले हैं।
अल्लाह तआला फ़रमाता है:
كُلُّ نَفْسٍ ذَائِقَةُ الْمَوْتِ ۖ ثُمَّ إِلَيْنَا تُرْجَعُونَ
“हर जान को मौत का स्वाद चखना है, फिर हमारी ही ओर लौटकर आना है।”
(सूरह अल-अनकबूत: 57)
मौत उम्र नहीं देखती।
कभी इंसान लंबी ज़िंदगी जीकर अपने रब के पास लौटता है और कभी कोई मासूम बच्चा बहुत कम उम्र में ही अपने रब के पास पहुँच जाता है।
यह अल्लाह तआला का फ़ैसला है और हमारा ईमान हमें उसके फ़ैसले के सामने सब्र और तस्लीम का रास्ता सिखाता है।
इस मासूम बच्ची के लिए दुआ
ऐ अल्लाह!
इस मासूम बच्ची पर अपनी ख़ास रहमत और कृपा फ़रमा।
उसे अपनी पनाह में जगह अता फ़रमा और उसे जन्नत के बाग़ों में स्थान प्रदान फ़रमा।
या अल्लाह! उसके लिए आख़िरत की सभी मंज़िलें आसान फ़रमा और उसे जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा।
उसकी मासूमियत को अपनी रहमत का ज़रिया बना और उसे अपने नेक बंदों की संगत नसीब फ़रमा।
या रब्ब! उसके माता-पिता के टूटे हुए दिलों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा।
उनके इस बड़े सदमे को उनके लिए अज्र और सवाब का ज़रिया बना।
उनके दिलों को अपने ज़िक्र और अपनी रहमत से सुकून अता फ़रमा और उन्हें इस कठिन परीक्षा में अपने फ़ैसले पर राज़ी रहने की तौफ़ीक़ अता फ़रमा।
माता-पिता के लिए नबी ﷺ की तसल्ली
रसूलुल्लाह ﷺ ने छोटी उम्र में बच्चों की वफ़ात पर सब्र करने वाले माता-पिता के लिए बड़ी खुशखबरी सुनाई है।
सहीह मुस्लिम 2635 में अबू हुरैरा رضي الله عنه से रिवायत है:
صِغَارُهُمْ دَعَامِيصُ الْجَنَّةِ، يَتَلَقَّى أَحَدُهُمْ أَبَاهُ ـ أَوْ قَالَ أَبَوَيْهِ ـ فَيَأْخُذُ بِثَوْبِهِ ـ أَوْ قَالَ بِيَدِهِ ـ كَمَا آخُذُ أَنَا بِصَنِفَةِ ثَوْبِكَ هَذَا، فَلَا يَتَنَاهَى ـ أَوْ قَالَ فَلَا يَنْتَهِي ـ حَتَّى يُدْخِلَهُ اللَّهُ وَأَبَاهُ الْجَنَّةَ
अर्थात, नबी ﷺ ने छोटे बच्चों के बारे में ऐसी तसल्ली दी कि वे जन्नत के पक्षियों के समान हैं; उनमें से कोई अपने माता-पिता से मिलेगा तो उनसे लिपट जाएगा और उन्हें तब तक नहीं छोड़ेगा, जब तक अल्लाह उसे और उसके माता-पिता को जन्नत में दाख़िल न कर दे।
(सहीह मुस्लिम: 2635)
एक अन्य सहीह हदीस में नबी ﷺ ने फ़रमाया:
مَا مِنَ النَّاسِ مِنْ مُسْلِمٍ يُتَوَفَّى لَهُ ثَلَاثٌ لَمْ يَبْلُغُوا الْحِنْثَ، إِلَّا أَدْخَلَهُ اللَّهُ الْجَنَّةَ بِفَضْلِ رَحْمَتِهِ إِيَّاهُمْ
अर्थात, जिस मुसलमान के तीन बच्चे बालिग़ होने से पहले वफ़ात पा जाएँ, अल्लाह अपनी रहमत से उसे जन्नत में दाख़िल फ़रमाएगा।
(सहीह बुख़ारी: 1248)
एक दूसरी रिवायत में दो बच्चों के बारे में भी बड़ी खुशखबरी आई है:
أَيُّمَا امْرَأَةٍ مَاتَ لَهَا ثَلَاثَةٌ مِنَ الْوَلَدِ كَانُوا حِجَابًا مِنَ النَّارِ. قَالَتِ امْرَأَةٌ: وَاثْنَانِ؟ قَالَ: وَاثْنَانِ
अर्थात, जिस महिला के तीन बच्चे वफ़ात पा जाएँ, वे उसके लिए जहन्नम से पर्दा बनेंगे। एक महिला ने पूछा: “और दो?” तो नबी ﷺ ने फ़रमाया: “और दो भी।”
(सहीह बुख़ारी: 1249–1250)
इसलिए इस नन्ही बच्ची के माता-पिता से हम यही कहेंगे:
आपका दुःख बहुत बड़ा है, लेकिन आपके रब की रहमत उससे भी बड़ी है।
आप अपनी बच्ची को खोकर केवल एक याद नहीं छोड़ रहे, बल्कि यदि आप सब्र करते हुए अल्लाह से अज्र की उम्मीद रखते हैं, तो यह सदमा आपके लिए आख़िरत के अज्र और अल्लाह की रहमत का कारण बन सकता है।
📖 अल्लाह तआला फ़रमाता है:
وَبَشِّرِ الصَّابِرِينَ الَّذِينَ إِذَا أَصَابَتْهُم مُّصِيبَةٌ قَالُوا إِنَّا لِلَّهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ أُولَٰئِكَ عَلَيْهِمْ صَلَوَاتٌ مِنْ رَبِّهِمْ وَرَحْمَةٌ ۖ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُهْتَدُونَ
“और सब्र करने वालों को खुशखबरी दे दीजिए। जब उन्हें कोई मुसीबत पहुँचती है तो वे कहते हैं: ‘हम अल्लाह ही के हैं और उसी की ओर लौटकर जाने वाले हैं।’ यही वे लोग हैं जिन पर उनके रब की ओर से विशेष कृपा और रहमत है और यही लोग हिदायत पाने वाले हैं।”
(सूरह अल-बक़रह: 155–157)
आज विद्यालय में एक मासूम आवाज़ कम हो गई है।
एक छोटी-सी मुस्कान, एक प्यारा-सा चेहरा और बचपन की अनेक मासूम यादें हमारे बीच हमेशा याद की जाती रहेंगी।
लेकिन एक मुसलमान का विश्वास है कि दुनिया का यह जीवन अंतिम मंज़िल नहीं है।
हम अल्लाह के हैं और उसी की ओर लौटकर जाने वाले हैं।
इसलिए आज आँसू बहाने के साथ-साथ हम अपनी इस मासूम बच्ची Fariha Parween के लिए दुआ करें और उसके माता-पिता के लिए सब्र की दुआ करें।
ऐ अल्लाह!
हमारी इस प्यारी मासूम बच्ची पर अपनी अनंत रहमत फ़रमा।
उसे जन्नतुल फ़िरदौस में स्थान अता फ़रमा।
उसके माता-पिता को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा।
उनके इस दुःख को उनके लिए अज्र और सवाब का ज़रिया बना।
और हम सभी को मौत से पहले आख़िरत की तैयारी करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमा।
آمِين يَا رَبَّ الْعَالَمِين
सभी से विनम्र अनुरोध है कि इस मासूम बच्ची के लिए दुआ करें और उसके माता-पिता के लिए सब्र की दुआ करें।
MEED PUBLIC SCHOOL परिवार
एक मासूम मुस्कान… एक अमर याद…