13/11/2025
फुर्सत दरअसल एक एहसास है, जिसमें वक़्त आपके पास नहीं बैठता, बल्कि आपके भीतर आकर टिक जाता है। आरण्यम में ये एहसास थोड़ा और नर्म हो जाता है, जैसे हवा आपके कानों के पास आकर कोई पुरानी याद फिर से सुना दे। पेड़ों की ऊँचाई में जो ख़ामोशी टंगी है, वो यूँ लगती है मानो किसी ने बहुत प्यार से आपका नाम धीरे-धीरे पुकारा हो। पहाड़ भी यहाँ अजनबी नहीं लगते, आपके कदमों की थकन को ऐसे ओढ़ लेते हैं जैसे कोई हमसफ़र सफ़र के बीच में आपके कंधे पर सिर रख दे। और जब शाम उतरती है, तो उजाला बस फीका नहीं पड़ता, वह रुककर आपको देखता है, जैसे इंतज़ार हो कि आप अपनी दिल की सबसे हल्की, सबसे छुपी हुई धड़कन को आखिर कब महसूस करेंगे।
आरण्यम में फुर्सत मोहब्बत की तरह है - बिना कहे, बिना माँगे, बस आकर आपकी हथेलियों में ठहर जाती है।
भूतकाल में स्वागत है आपका.